एसिड अटैक पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया? बायोमेट्रिक पहचान को लेकर छलका दर्द
एसिड अटैक पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया? बायोमेट्रिक पहचान न पाने को लेकर छलका दर्द
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Acid Attack Victim: एसिड अटैक से पीड़ित को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से भी बड़ी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। ये तकलीफ तब और भी बढ़ जाती है जब एक पीड़िता को अपना पहचान बचान बताने या फिर केवाईसी कराना में दिक्कत का सामना करना पड़े, ऐसी ही तकलीफों को झेल रही एसिड अटैक से पीड़ित नौ युवतियो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और अपने जैसी सैंकड़ों पीड़िताओं की डिजिटल केवाईसी कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की है।
एसिड अटैक से पीड़ित इन महिलाओं ने अपनी अर्जी में दलील दी है कि एसिड अटैक के बाद उनकी हाथों की अंगुलियों, आंखों की पुतलियों और अन्य बायोमेट्रिक पहचान का स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा है। जिसकी वजह से बैंक खाता खोलने, आधार कार्ड बनवाने, संपत्ति को रजिस्ट्री कराने और अपडेट करने साथ ही मोबाइल सिम कार्ड खरीदने जैसी स्थिति में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पलकें झपकाने, उंगलियों के निशान देने में दिक्कत
केवाईसी की प्रक्रिया में पुतलियों की डिजिटल डिटेलिंग और जीवित होने का प्रमाण देने के लिए पलकें झपकाना, उंगलियों के निशान आदि लेना कई बार नामुमकिन होता है। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट से अपील की जा रही है कि कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश देकर हमारी मुश्किल और मजबूरी को देखते हुए डिजिटल केवाईसी की समावेशित और वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके लिए केन्द्र सरकार बैंक और अन्य सभी संबंधित निकायों और प्राधिकरणों के लिए गाइडलाइन जारी करने की अपील भी की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले से दिए हैं ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक को रोकने के लिए राज्य और केंद्र की सरकारों को आदेश दिए हुए हैं कि एसिड की बिक्री को रेगुलेट करने के लिए सख्त कानून बनाएं और एडिट अटैक की पीड़िता को इलाज के लिए 3 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
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10 साल से लेकर उम्रकैद तक की है सजा
एक्ट की बात की जाए तो आईपीसी धारा 326 ए के तहत किसी व्यक्ति ने अगर जानबूझकर किसी पर तेजाब फेंका और स्थाई रूप से उसे नुकसान पहुंचाया है तो इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाता है। यह अपराध गैर जमानती होता है। वहीं दोषी पाए जाने पर कम से कम 10 साल या फिर उम्रकैद तक की सजा भी हो सकती है।