अपडेटेड 8 January 2026 at 23:35 IST
मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका डकार गया 50 मिलियन बैरल तो रूस-चीन ने खींचीं तलवारें... ट्रंप के तेल के खेल में दो धड़ों में कैसे बंटी दुनिया?
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकास में एक ऑपरेशन में गिरफ्तार कर लिया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकास में एक ऑपरेशन में गिरफ्तार कर लिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम दिया, जिसमें 150 जेट विमानों और CIA की विशेष यूनिट ने हिस्सा लिया।
मादुरो और उनकी पत्नी को नार्को-टेररिज्म के आरोपों में न्यूयॉर्क कोर्ट में पेश किया गया, जहां उन्होंने अमेरिकी 'आक्रमण' का रोना रोया। इस घटना के तुरंत बाद ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका को वेनेजुएला से 30-50 मिलियन बैरल उच्च गुणवत्ता वाला तेल हासिल होने वाला है, जिसे बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा। यह तेल दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार वाले देश से आएगा, जो पहले अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ज्यादातर रूस-चीन के हाथों बिकता था।
50 मिलियन बैरल की कीमत
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वेनेजुएला की अंतरिम अथॉरिटीज अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल हाई क्वालिटी तेल सौंपेंगी। यह तेल मार्केट प्राइस पर बेचा जाएगा, और उस पैसे को अमेरिका के प्रेसिडेंट के तौर पर मैं कंट्रोल करूंगा, ताकि यह पक्का हो सके कि इसका इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के फायदे के लिए हो! मैंने एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट से इस प्लान को तुरंत लागू करने के लिए कहा है। इसे स्टोरेज जहाजों से ले जाया जाएगा, और सीधे अमेरिका में अनलोडिंग डॉक्स पर लाया जाएगा। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!"
आपको बता दें कि वर्तमान क्रूड ऑयल की कीमत $56.20 प्रति बैरल मानें तो यह $2.8 अरब डॉलर का सौदा है। अमेरिका ने पहले दिसंबर 2025 में एक टैंकर जब्त किया था, जिसमें 1 मिलियन बैरल था, लेकिन यह नया हस्तांतरण ऐतिहासिक है। वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल भंडार है, जो सऊदी अरब से ज्यादा है, लेकिन भारी तेल होने से निष्कर्षण महंगा पड़ता था। ट्रंप का 'तेल खेल' अब वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला रहा है, जहां अमेरिका अब उत्पादक और नियंत्रक दोनों बन गया।
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रूस-चीन ने खींचीं तलवारें
रूस और चीन ने इसे 'साम्राज्यवादी आक्रमण' करार दिया। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।" रूस ने UN में आपात बैठक बुलाई, और प्रतिबंधों की धमकी दी। ईरान ने तेल आपूर्ति रोकने की चेतावनी जारी की, जबकि क्यूबा के 40 सैनिक हमले में मारे गए। दोनों देशों ने अपने नागरिकों को वेनेजुएला से लौटने को कहा और नौसेना तैनाती बढ़ाई। यह शीत युद्ध 2.0 जैसा लग रहा है, जहां तेल संसाधन भू-राजनीति का हथियार बन सकता है।
दो खेमे में बंटी दुनिया
दुनिया स्पष्ट दो धड़ों में बंट गई हैः
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- अमेरिकी खेमा: इजराइल, यूक्रेन
- विरोधी खेमा: BRICS (रूस, चीन, ईरान), कुछ लैटिन अमेरिकी देश।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 8 January 2026 at 23:20 IST