EXPLAINER/ रोम में बैठकर PM मोदी और मेलोनी लिखेंगे चीन की 'बर्बादी' की स्क्रिप्ट, PAK का 'CPEC ड्रीम' भी होगा खाक! क्या भारत को मिलेगा 'ब्रह्मास्त्र'?
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करा दिया। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। यूरोप के शेयर बाजार धड़ाम हो रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करा दिया। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। यूरोप के शेयर बाजार धड़ाम हो रहे हैं। चीन बेचैन है। पाकिस्तान सहमा हुआ है। और ऐन इसी वक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की ऐतिहासिक यात्रा के आखिरी पड़ाव, इटली की राजधानी रोम, में कदम रख रहे हैं।
यह महज एक राजनयिक दौरा नहीं है। यह उस नई विश्व व्यवस्था की नींव रखने का क्षण है, जिसमें भारत एक खामोश दर्शक नहीं, बल्कि सूत्रधार है। आज रोम में पीएम मोदी और इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी जिस एजेंडे पर बात करने वाले हैं, उसका नाम है- IMEC यानी इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर। और यही वह हथियार है जो चीन की 'बेल्ट एंड रोड' की काट है।
G20 शिखर सम्मेलन में ऐलान
पिछले दो दशकों में चीन ने बड़ी चतुराई से दुनिया को अपने 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के जाल में फंसाया। श्रीलंका का हंबनटोटा बंदरगाह हो या अफ्रीका के 22 से ज्यादा देशों की कर्ज में डूबी अर्थव्यवस्थाएं, BRI ने जहां-जहां पैर पसारे, वहां-वहां चीनी प्रभुत्व का झंडा गड़ा। पाकिस्तान से गुजरने वाले CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) को तो बीजिंग ने अपनी क्षेत्रीय रणनीति का सबसे बड़ा हथियार बताया।
लेकिन भारत ने इसका जवाब उसी की भाषा में देने का फैसला किया। सितंबर 2023 में नई दिल्ली के G20 शिखर सम्मेलन में IMEC की घोषणा हुई। इस पर भारत, अमेरिका, सऊदी अरब, UAE, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ, यानी दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों ने दस्तखत किए। यह CPEC की तरह किसी एक देश का एकतरफा प्रोजेक्ट नहीं है। यह बराबरी की साझेदारी है।
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क्या है IMEC और क्यों है यह गेम-चेंजर
IMEC दो हिस्सों में बंटा है। पूर्वी कॉरिडोर भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ेगा। उत्तरी कॉरिडोर खाड़ी से यूरोप तक जाएगा, UAE, सऊदी अरब, जॉर्डन, इजराइल होते हुए भूमध्य सागर के पार, इटली के ट्रिएस्टे बंदरगाह तक। इसमें सिर्फ जहाज और रेल नहीं होंगे।
इसमें होंगे:
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- रेलवे लाइनें और आधुनिक सड़क नेटवर्क
- ऊर्जा आपूर्ति के लिए पाइपलाइनें
- समुद्र की तलहटी में डिजिटल केबल
- सौर, पवन और ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी का आदान-प्रदान
- UPI जैसा साझा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म
यानी एक ही झटके में कार्गो, ऊर्जा और डेटा तीनों सेक्टर बदल जाएंगे। अभी भारत से यूरोप माल जाने में जो खर्च और समय लगता है, IMEC के बाद उसमें क्रांतिकारी बदलाव होगा। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, माल ढुलाई की लागत 30 प्रतिशत तक कम होगी और पारगमन में लगने वाला समय 40 प्रतिशत तक घटेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा छोटे और मझोले कारोबारियों को होगा, जिनके लिए लॉजिस्टिक्स हमेशा से सिरदर्द रहा है।
पाकिस्तान को भी चुनौती?
जल्दी खराब होने वाले सामान जैसे फल, सब्जियां, दवाइयां, मेडिकल उपकरण, इस कॉरिडोर से सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। कम समय, कम खर्च, कम बर्बादी। CPEC के जरिए पाकिस्तान ने खुद को भारत और यूरोप के बीच एक भौगोलिक दीवार की तरह खड़ा करने की कोशिश की है। IMEC इस दीवार को बाईपास करता है। यह भारत की कनेक्टिविटी को एक नया मार्ग देता है जो पूरी तरह स्वतंत्र और सुरक्षित है।
इटली इस पूरे समीकरण में एक अहम कड़ी है। IMEC का यूरोपीय सिरा इटली के ट्रिएस्टे बंदरगाह पर खत्म होता है। मेलोनी सरकार पहले से अफ्रीका के लिए अपनी 'मत्तेई योजना' पर काम कर रही है, जो IMEC के साथ मिलकर इस कॉरिडोर को अफ्रीका तक भी विस्तारित करने का रास्ता खोलती है।
आज रोम में जो बातचीत होगी, वह दोनों देशों के 2025-2029 के संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना को आगे बढ़ाएगी। सबसे जरूरी बात यह है कि IMEC, BRI से बुनियादी रूप से अलग है। भारत का स्पष्ट संदेश है: यह कॉरिडोर किसी पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि आपसी समृद्धि के लिए है। हर देश की संप्रभुता का सम्मान होगा। कोई कर्ज का जाल नहीं। कोई छुपा हुआ एजेंडा नहीं।