Iran Israel War: ईरान की धमकी पर आसिम मुनीर के फूले हाथ-पैर, मिलाया ट्रंप को फोन तो US राष्ट्रपति के तेवर भी पड़े ढीले, लेंगे ये बड़ा फैसला?

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी पर चिंता जताते हुए इसे "बातचीत में बाधा" बताया।

Donald Trump,  Asim Munir
Donald Trump, Asim Munir | Image: ANI

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक पाकिस्तानी अधिकारी के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी पर चिंता जताते हुए इसे "बातचीत में बाधा" बताया।

सूत्र ने बताया कि बातचीत के दौरान, मुनीर ने ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता कराने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर इस नाकेबंदी के असर को रेखांकित किया।

आपको बता दें कि होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी ने ईरान को एक बार फिर स्ट्रेट पर चौकसी बढ़ाने पर मजबूर कर दिया। अब ईरान ने धमकी दे दी है कि अगर ऐसा चलता रहा तो कोई बातचीत नहीं होगी। इससे मुनीर के 'शांति दूत' बनने के ख्वाब भी टूटते नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सीजफायर के लिए बेचैन ट्रंप की भी बेचैनी बढ़ गई है।

अब अगर ट्रंप ईरान के साथ कोई डील करने के लिए बेचैन हैं तो उन्हें सबसे पहले अमेरिकी नेवी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हटाना पड़ेगा।

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क्या बोले ट्रंप?

एक पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्र के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि वह इस संबंध में मुनीर की सलाह पर विचार करेंगे कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकेबंदी, ईरान के साथ शांति वार्ता में एक बाधा है।

तनाव तब और बढ़ गया, जब...

मुनीर की यह पहल तेहरान की उनकी हालिया तीन-दिवसीय यात्रा के बाद हुई, जहां उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। इस नेतृत्व में राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और सेना के शीर्ष अधिकारी शामिल थे। पाकिस्तान ने इस यात्रा को तनाव कम करने की दिशा में एक प्रयास बताया।

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इस महीने की शुरुआत में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबफ अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद गए थे। दशकों में दोनों पक्षों के बीच यह अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय सीधी बातचीत थी। हालांकि, बातचीत का वह दौर बिना किसी ठोस नतीजे के ही समाप्त हो गया।

सप्ताहांत में तनाव तब और बढ़ गया, जब अमेरिका ने ईरान के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया। अमेरिका ने उस जहाज पर अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी को चकमा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। तेहरान की सेना ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, जबकि अराघची ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा कि ईरानी जहाजों के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई प्रस्तावित बातचीत से ठीक पहले 'बदनीयती' का संकेत देती है।

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Published By :
Kunal Verma
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