Kanpur: लैम्बोर्गिनी सवार ने 6 लोगों को कुचला, तो पुलिसकर्मी कार्रवाई के बजाय लग्जरी कार के साथ फोटो खिंचवाने में दिखे मस्त, Video Viral

कानपुर की VIP रोड पर एक तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी, जिसे कथित तौर पर जाने-माने तंबाकू व्यापारी टाइकून केके मिश्रा का बेटा चला रहा था, ने कई पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों को टक्कर मार दी।

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कानपुर की VIP रोड पर एक तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी, जिसे कथित तौर पर जाने-माने तंबाकू व्यापारी टाइकून केके मिश्रा का बेटा चला रहा था, ने कई पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहनों को टक्कर मार दी। इस घटना के एक दिन बाद सोमवार को एक नया विवाद तब शुरू हो गया, जब कानपुर पुलिस के एक अधिकारी को लग्जरी गाड़ी के साथ तस्वीरें खिंचवाते देखा गया।

गवालटोली पुलिस स्टेशन के एक पुलिस इंस्पेक्टर की लैंबॉर्गिनी के साथ तस्वीरें खिंचवाने की तस्वीरें ऐसे समय में सामने आई हैं, जब इस मामले में भारी जन आक्रोश और 'VIP ट्रीटमेंट' के आरोप लग रहे हैं, जिसके बाद कथित तौर पर कानपुर पुलिस कमिश्नर ने इसमें शामिल गड़बड़ियों पर ध्यान दिया।

पुलिस ने कार जब्त कर ली

बताया जा रहा है कि कार तंबाकू टाइकून केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा चला रहा था। सड़क हादसे में कम से कम छह लोग घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने कार जब्त कर ली। हालांकि, शुरू में दर्ज FIR में ड्राइवर का नाम नहीं था।

सूत्रों के अनुसार, पुलिस के पहुंचने के बावजूद मिश्रा के घर के दरवाजे नहीं खोले गए। यह भी सामने आया है कि पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और 24 घंटे बाद ही जांच शुरू की। जबकि पुलिस के लिए दरवाजे नहीं खोले गए, एक वकील को तुरंत बुलाए जाने के बाद घर पहुंचते देखा गया।

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DCP अतुल कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, यह हादसा रविवार को दोपहर करीब 3:15 बजे ग्वालटोली में Rev-3 मॉल के पास हुआ था। हंगामे के बाद स्थानीय लोगों ने ड्राइवर को भागने से रोकने के लिए लैंबॉर्गिनी को घेर लिया।

FIR में ड्राइवर का नाम क्यों नहीं लिखा गया?

चश्मदीदों ने दावा किया कि ड्राइवर के साथ मौजूद प्राइवेट सुरक्षा गार्डों ने आस-पास खड़े लोगों के साथ बदतमीजी की। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और ड्राइवर के साथ-साथ घायलों को भी पास के अस्पताल ले गई।

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अब ध्यान प्रोटोकॉल की घोर कमी पर चला गया है, लोग जानना चाहते हैं कि घटनास्थल पर पहचान होने के बावजूद शुरू में FIR में ड्राइवर का नाम क्यों नहीं लिखा गया, और सबूत के लिए महत्वपूर्ण 'गोल्डन आवर' के दौरान अनिवार्य अल्कोहल टेस्ट क्यों नहीं किया गया।

औपचारिक जांच शुरू होने से पहले संदिग्ध को 'निकालने' में प्राइवेट बाउंसरों की भूमिका ने भी इस बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं कि क्या मानक कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के लिए 'VIP शील्ड' का इस्तेमाल किया गया था। मामले में जरूरी कार्रवाई करने के बजाय गाड़ी के साथ पोज देने वाले पुलिस इंस्पेक्टर ने ऐसे मामलों में आरोपी को जवाबदेह ठहराने में अधिकारियों की अक्षमता को लेकर चल रहे विवाद को और बढ़ा दिया है।

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Published By:
 Kunal Verma
पब्लिश्ड