Raghav Chadha: यूनिफॉर्म पहन बाइक पर बैठे और सामान लेकर निकल पड़े... जब सांसद राघव चड्ढा बने डिलीवरी बॉय, पूरे दिन दी सर्विस; VIDEO
राघव चड्ढा ने संसद में गिग वर्कर्स के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी परेशानियों को उठाया था। अब वो खुद डिलीवरी बॉय बन उनकी समस्याओं को समझने के लिए निकल पड़े।
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Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से गिग वर्कर्स की समस्याओं को उठाने के लिए सुर्खियों में बने हुए हैं। अब उन्होंने उनकी जिंदगी समझने के लिए खुद डिलीवरी बॉय बनकर काम किया। इसका वीडियो भी सामने आया है जिसमें उन्हें ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय के गेटअप में स्कूटी पर निकलते देखा जा सकता है।
राघव चड्ढा ने खुद अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर किया है। इसमें राघव ने बताया कि उन्होंने पूरा एक दिन बतौर डिलीवरी बॉय बिताया। वीडियो में देखा जा सकता है कि वो ब्लिंकिट डिलवरी बॉय की टी-शर्ट पहनते हैं। साथ में कंपनी का बैग भी कंधे पर टांगते हैं। हालांकि, उन्होंने अपना चेहरा मास्क के पीछे छुपाया होता है। ऐसा इसलिए ताकि उन्हें कोई पहचान न सके और डिलीवरी बॉय के काम और उनकी दिक्कतों को समझने में किसी तरह की बाधा पैदा न हो।
डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा
राज्यसभा सांसद डिलीवरी बॉय के तौर पर भरी दोपहरी में काम पर निकले और देर रात तक सामान की डिलीवरी करते रहे। इस दौरान उन्होंने दरवाजे पर जा-जाकर सभी सामान की डिलीवरी की। साथ ही सुनिश्चित किया कि डिलीवरी के समय इस काम में लगे लोगों को किस तरह की दिक्कतें आती हैं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर। मैंने उनका दिन जिया। बने रहें।'
लोगों ने की राघव चड्ढा की तारीफ
चड्ढा ने 12 जनवरी की सुबह 11 बजे वीडियो को शेयर किया था, जिसे खबर लिखे जाने तक 940K से अधिक बार देखा जा चुका है। कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की झड़ी लगी हुई है। एक यूजर ने लिखा, 'एक राजनेता सच में जमीनी मुद्दे को नजदीक से समझ रहा है और उस मुद्दे को सही प्लेटफॉर्म पर उठाता भी है। काबिल-ए-तारीफ है।' दूसरे यूजर ने लिखा, 'आपके जैसे युवा नेता लोगों की दिक्कतें समझने की कोशिश कर रहे हैं देखकर अच्छा लगा। संसद में सभी जायज मुद्दे उठाने के लिए धन्यवाद देता हूं।' एक और यूजर ने लिखा, 'ये समय की मांग है कि जो भी पावर में है वो जमीनी दिक्कतों को समझे।'
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संसद में उठा चुके हैं मुद्दा
राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र में लाखों डिलीवरी एजेंट की समस्याओं और कमाई की ओर ध्यान दिलाया था। उन्होंने कम मजदूरी, लंबे काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा की कमी और एल्गोरिदम से आने वाले दबाव का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था।