UP में नया मोर्चा... पल्लवी पटेल ने मिलाया असदुद्दीन ओवैसी से हाथ; अखिलेश के लिए क्यों सिरदर्द?
Lok Sabha Election 2024: पल्लवी पटेल ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन कर लिया है। लखनऊ से इस नए गठबंधन का ऐलान किया जाएगा।
- चुनाव न्यूज़
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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोर्चा बन रहा है। अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने लोकसभा चुनावों के लिए यूपी में AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी से हाथ मिलाया है। अपना दल कमेरावादी और यूपी में अपनी जमीन मजबूत करने में लगी AIMIM नए गठबंधन को लेकर सहमति हो गई हैं। लखनऊ से इस नए गठबंधन का ऐलान किया जाएगा।
पल्लवी पटेल की पार्टी अपना दल कमेरावादी पहले ही समाजवादी पार्टी और INDI गठबंधन का साथ छोड़ चुकी है। इसके बाद वो लगातार नए गठबंधन की तलाश में थीं, जो हैदराबाद जाकर खत्म हुई। बताया जाता है कि पिछले एक हफ्ते से पल्लवी पटेल कई बार हैदराबाद आईं गईं और आखिरकार दोनों (पल्लवी पटेल और ओवैसी) में सहमति बनी है।
पल्लवी पटेल ने क्यों सपा से नाता तोड़ा?
2022 के राज्य चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी ने कई छोटे दलों के साथ एक गठबंधन बनाया था, जिसमें पल्लवी पटेल का अपना दल (के) भी शामिल था। हालांकि पिछले दिनों समाजवादी पार्टी और अपना दल (के) में झगड़ा राज्यसभा चुनाव में वोटिंग को लेकर शुरू हुआ था। विधायक पल्लवी पटेल ने फरवरी के राज्यसभा चुनावों में 2 सपा उम्मीदवारों को वोट देने से इनकार कर दिया था और कहा कि सपा ने अपने स्वयं के पीडीए (पिछड़ा, दलित) को नजरअंदाज किया।
बाद में लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर भी सपा और अपना दल (के) में असहमति थी। अपना दल (के) ने घोषणा की थी कि वो आगामी लोकसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार उतारेगी। जिन सीटों पर उन्होंने चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी, वो पूर्वी यूपी में फूलपुर, मिर्जापुर और कौशांबी थीं। ये सभी सीटें 2019 में बीजेपी ने जीती थीं। हालांकि समाजवादी पार्टी ने जब अपनी लिस्ट जारी की तो उसमें मिर्जापुर के लिए उम्मीदवार को उतारा गया था, जिस पर अपना दल (के) ने दावा किया था। अखिलेश यादव भी कह चुके थे- '2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (कमेरावादी) के साथ गठबंधन में थे लेकिन 2024 में ऐसा नहीं है।'
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नए मोर्चे में कौन-कौन दल?
फिलहाल पल्लवी पटेल ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन कर लिया है। बताया जाता है कि इस नए गठबंधन में स्वामी प्रसाद और चंद्रशेखर को भी जोड़ने की कोशिश थी, लेकिन दोनों ने इनकार कर दिया था। चर्चाएं हैं कि पीस पार्टी भी इसी धड़े में आ सकती है। पल्लवी पटेल तीसरे मोर्चे का नेतृत्व कर सकती हैं।
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नया मोर्चा अखिलेश के लिए टेंशन क्यों?
इस तीसरे मोर्चे में शामिल असदुद्दीन ओवेसी की पार्टी AIMIM ही समाजवादी पार्टी के लिए सिरदर्द रहेगी। क्योंकि कुछ सीटों पर ओवैसी फैक्टर अगर चला तो सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा। चुनाव में ओवैसी की मुस्लिम वोटों पर नजर लाजिमी है और यूपी में तकरीबन 19 फीसदी से ज्यादा मुसलमान हैं। कुछ लोकसभा क्षेत्रों को ये आबादी औसतन 30 फीसदी के करीब तक है। ऐसे में अगर AIMIM वोट कटवा पार्टी बनकर भी उभरी तो उससे मुश्किल समाजवादी पार्टी के लिए होगी।
इसे ऐसे समझिए कि जब पिछली बार उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो ओवैसी की पार्टी ने 95 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। ये बात अलग है कि चुनाव में AIMIM को पूरे राज्य में एक फीसदी से कम वोट मिले, लेकिन कुछ सीटों पर ओवैसी फैक्टर के चलते वोट बंटा तो फायदा बीजेपी को मिला था। बिजनौर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, जौनपुर जैसी मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही थी।
इधर ओवैसी का साथ मिलने पर पल्लवी पटेल समाजवादी पार्टी के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती हैं। वो इसलिए कि पल्लवी पटेल खुद पिछड़े और दलितों की बात करती हैं, जिन्हें अखिलेश यादव अपने पीडीए का हिस्सा बनाकर चल रहे हैं। ओवैसी का अल्पसंख्यक भी पल्लवी के साथ जुड़ेगा तो ये समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछला, दलित और अल्पसंख्यक) का भी एक स्वरूप होगा। इससे तय है कि अखिलेश यादव का पीडीए प्लान बिगड़ सकता है।