क्या चीन में हो गई ट्रंप की बेइज्जती? एयरपोर्ट पर US राष्ट्रपति को रिसीव करने नहीं गए जिनपिंग, लेकिन ओबामा का किया था जोरदार स्वागत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को बीजिंग पहुंचे। यहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध, व्यापार और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को बीजिंग पहुंचे। यहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान युद्ध, व्यापार और ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
यह शिखर सम्मेलन गुरुवार को होगा, जब दोनों नेता द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और एक औपचारिक भोज में शामिल होंगे। लेकिन, चीनी राजधानी में 'एयर फोर्स वन' के उतरने के बाद चीन ने ट्रंप का भव्य स्वागत किया।
व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग, वाशिंगटन में चीन के राजदूत शी फेंग, विदेश मंत्रालय के कार्यकारी उप मंत्री मा झाओक्सू और बीजिंग में अमेरिकी दूत डेविड परड्यू ने किया। स्वागत समारोह में लगभग 300 चीनी युवा, एक सैन्य सम्मान गार्ड और एक सैन्य बैंड शामिल थे।
हालांकि, एक सवाल जो हर किसी के मन में चल रहा है, वो ये है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ट्रंप के स्वागत के लिए एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे थे। जबकि, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को रिसीव करने जिनपिंग खुद पहुंचे थे।
क्या है कारण?
असल में इसका कारण चीन के प्रोटोकॉल में छुपा है। चीनी प्रोटोकॉल के मुताबिक, किसी भी मेहमान के स्वागत के लिए चीन के राष्ट्रपति खुद एयरपोर्ट पर नहीं जाते। मेहमानों का स्वागत हमेशा चीनी उपराष्ट्रपति के द्वारा ही किया जाता है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग, चीन के राष्ट्रपति ने अभी तक किसी भी विदेशी मेहमान का एयरपोर्ट पर स्वागत नहीं किया है।
फिर सवाल ये है कि बराक ओबामा का स्वागत करने के लिए शी जिनपिंग क्यों पहुंचे थे। असल में, उस वक्त शी जिनपिंग चीन के उपराष्ट्रपति थे। प्रोटोकॉल के मुताबिक, उपराष्ट्रपति ही मेहमानों का स्वागत करते हैं। इसलिए, ओबामा के स्वागत के लिए जिनपिंग खुद एयरपोर्ट पहुंचे थे।
चीन से क्या चाहते हैं ट्रंप?
ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि वह चीन के साथ एक 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगा, ताकि दोनों देशों के बीच के मतभेदों को सुलझाया जा सके। यह बोर्ड उस व्यापार युद्ध को रोकने में मदद कर सकता है, जो पिछले साल ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद शुरू हुआ था; चीन ने 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (दुर्लभ खनिज) पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल करके इस कदम का जवाब दिया था। इसी के चलते पिछले साल अक्टूबर में एक साल के लिए युद्धविराम हुआ था।
लेकिन ट्रंप ऐसे समय में बीजिंग का दौरा कर रहे हैं, जब ईरान का मुद्दा उनके घरेलू एजेंडे पर हावी है। इस युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (जलडमरूमध्य) लगभग बंद हो गया है, जिससे तेल और प्राकृतिक गैस के टैंकर वहीं फंस गए हैं और ऊर्जा की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि वे वैश्विक आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचा सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इस संघर्ष को सुलझाने में शी (जिनपिंग) की मदद की जरूरत नहीं है, हालांकि पिछले हफ्ते ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बीजिंग में ही थे।
ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "हमारे पास चर्चा करने के लिए बहुत सी चीजें हैं। सच कहूं तो, मैं यह नहीं कहूंगा कि ईरान उनमें से एक है, क्योंकि ईरान हमारे पूरी तरह से नियंत्रण में है।"
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 14 May 2026 at 07:36 IST