तेल संकट से चरमरा जाएगी दुनिया! होर्मुज के बाद लाल सागर को भी ईरान ने दहलाया, जानिए सऊदी अरब के 'लाइफलाइन' पर हमला डरावना क्यों?
इस हमले के कारण पाइपलाइन के जरिए पंप किए जाने वाले तेल की मात्रा में प्रतिदिन लगभग 700,000 बैरल की कमी आई है।
सऊदी अरब के एक प्रमुख पाइपलाइन पर हमले ने दुनिया को एक बार फिर डरा दिया है। आपको बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने के बाद तेल का एक बड़ा हिस्सा लाल सागर से पूरी दुनिया में सप्लाई किया जा रहा है, जिसमें सऊदी अरब के ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का अहम रोल था।
सऊदी की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि इस हमले के कारण पाइपलाइन के जरिए पंप किए जाने वाले तेल की मात्रा में प्रतिदिन लगभग 700,000 बैरल की कमी आई है।
क्यों जरूरी है ये पाइपलाइन?
यह पाइपलाइन देश के पूरब में मौजूद सऊदी तेल क्षेत्रों से लेकर लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक जाती है, और होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास कर देती है। यह हर दिन किंगडम के तेल का एक बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकती है।
पिछले महीने, दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी, सऊदी अरामको ने घोषणा की कि वह लाखों बैरल कच्चे तेल का रास्ता बदल देगी। यह तेल आम तौर पर फारसी खाड़ी में लोड किया जाता था और जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता था, लेकिन अब इसे इस पाइपलाइन के जरिए भेजा जाएगा।
सऊदी अरामको के अनुसार, अपनी पूरी क्षमता पर, ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन हर दिन 70 लाख बैरल तक कच्चा तेल ले जा सकती है। यह उस लगभग 1.5 करोड़ बैरल तेल की कुछ हद तक भरपाई कर देता है, जो आम तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
उत्पादन क्षमता में लाखों बैरल की कमी
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने सरकारी समाचार एजेंसी SPA को बताया कि एक अहम पंपिंग स्टेशन पर हुए हमलों की वजह से पाइपलाइन की तेल ले जाने की क्षमता में हर दिन 7 लाख बैरल की कमी आ गई। दूसरी सुविधाओं पर हुए और हमलों की वजह से रोजाना की उत्पादन क्षमता में लाखों बैरल की और कमी आ गई।
बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य में 2023 से शुरू हुए हमले
2023 के आखिर में, यमन में मौजूद हूती लड़ाकों ने बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य, जो लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित है और जिसका अरबी में मतलब "आंसुओं का द्वार" है, से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया। यह हमला गाजा में इजरायल के युद्ध के बदले में किया गया था। इन हमलों की वजह से शिपिंग कंपनियों को एक लंबा रास्ता अपनाना पड़ा, जिससे यात्रा में कई हफ्ते ज्यादा लगने लगे और उन्हें ईंधन, बीमा और नाविकों की मजदूरी पर ज्यादा खर्च करना पड़ा।
वॉर्टेक्सा के मुताबिक, मार्च के पहले 28 दिनों में, बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले कच्चे तेल की मात्रा फ़रवरी के मुकाबले 21% बढ़ गई। अब ये खेप हूथी लड़ाकों के नए हमलों का संभावित निशाना बन सकती हैं।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 10 April 2026 at 17:55 IST