अपडेटेड 1 January 2026 at 16:04 IST
'चीन ने कराया भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर', ट्रंप के बाद अब ड्रैगन के इस दावे से भड़के ओवैसी; कहा- मोदी सरकार देश को भरोसा दिलाए...
अमेरिका के बाद अब चीन ने भी दावा किया है कि उसने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
अमेरिका के बाद अब चीन ने भी दावा किया है कि उसने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। आपको बता दें कि ये बयान तब आया है, जब नई दिल्ली ने बार-बार किसी भी तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी को खारिज किया है और कहा है कि स्थिति दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत से सुलझी थी।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान एक बार फिर दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान विवाद को सुलझाने में मदद की थी।
इसको लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बयान जारी कर इस मामले में अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार को तुरंत इस मामले में बयान जारी कर इस दावे को खारिज करना चाहिए।
क्या बोले ओवैसी?
ओवैसी ने कहा, "चीनी विदेश मंत्री का यह दावा हैरान करने वाला है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बीजिंग ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर में मध्यस्थता की थी। मैं मांग करता हूं कि मोदी सरकार इस दावे को आधिकारिक तौर पर खारिज करे और देश को भरोसा दिलाए कि किसी तीसरे पक्ष का दखल मंजूर नहीं है। हम सब जानते हैं कि चीन पाकिस्तान को 81% हथियार सप्लाई करता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसने पाकिस्तान को रियल-टाइम इंटेलिजेंस भी दी थी।"
चीनी विदेश मंत्री ने क्या कहा था?
मंगलवार को बीजिंग में अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन के विदेश संबंधों पर सिम्पोजियम में बोलते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, "हॉटस्पॉट मुद्दों को सुलझाने के चीनी तरीके को अपनाते हुए, हमने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजराइल के बीच मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।"
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने असल में क्या किया?
पिछले महीने जारी एक अमेरिकी कमीशन की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष का मौकापरस्ती से फायदा उठाकर अपनी रक्षा क्षमताओं को टेस्ट और बढ़ावा दिया। यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीजिंग ने 7 से 10 मई तक चले चार दिन के संघर्ष का फायदा उठाकर अपने हथियारों की आधुनिकता को टेस्ट और प्रचारित किया, जो भारत के साथ चल रहे सीमा तनाव और अपने बढ़ते रक्षा उद्योग के लक्ष्यों के संदर्भ में उपयोगी हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, "यह टकराव पहली बार था जब चीन के आधुनिक हथियार सिस्टम, जिसमें HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और J-10 फाइटर एयरक्राफ्ट शामिल हैं, का सक्रिय युद्ध में इस्तेमाल किया गया, जो एक वास्तविक दुनिया के फील्ड एक्सपेरिमेंट जैसा था।"
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 1 January 2026 at 16:04 IST