अपडेटेड 2 October 2025 at 18:08 IST
'भारत में लोकतंत्र नहीं, लोगों को बोलने का अधिकार नहीं...', राहुल गांधी के बयान पर फूटा BJP का गुस्सा; रविशंकर प्रसाद बोले- शर्म आनी चाहिए
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अब कोलंबिया में ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अब कोलंबिया में ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। आपको बता दें कि राहुल गांधी ने कहा है कि भारत में लोकतंत्र पर हमले हो रहे हैं, हम चीन की तरह लोगों को दबा नहीं सकते हैं।
अब राहुल गांधी के विवादित बयानों पर बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है। रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि चीन के प्रति आपका प्रेम जगजाहिर है, और आप भारत का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
क्या बोले रविशंकर प्रसाद?
रविशंकर प्रसाद ने अपने बयान में कहा, "कोलंबिया के बोगोटा में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र नहीं है और लोगों को बोलने की आजादी नहीं है। राहुल गांधी सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री मोदी और देश के विकास को गाली देते हैं। अगर आप विदेश जाकर भारत का अपमान करेंगे, तो जनता आपको वोट नहीं देगी और आप वो सीटें नहीं जीत पाएंगे जो आपने इस बार जीती हैं। अब आप चीन की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि भारत एक बड़ी वैश्विक शक्ति नहीं बन सकता, लेकिन चीन दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और तीसरी बनने की राह पर है। चीन के प्रति आपका प्रेम जगजाहिर है, और आप भारत का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।"
बीजेपी नेता ने कहा, "राहुल गांधी विदेश में हैं। बेहतर होता अगर विजयादशमी के अवसर पर वे देशवासियों को शुभकामनाएं देते। लेकिन इसके बजाय, वे भारत के खिलाफ बोलना पसंद करते हैं। राहुल गांधी को देश को बदनाम करने और देशवासियों को प्राप्त स्वतंत्रता पर सवाल उठाने की आदत हो गई है, और वह भी विदेशी धरती पर। वे लगातार प्रधानमंत्री मोदी पर झूठे आरोप लगाते हैं, उन्हें बेशर्मी से गालियां देते हैं, और विदेश में दावा करते हैं कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। राहुल गांधी की हर बात निराधार है। जब वे विदेश में होते हैं, तो कहते हैं कि भारत में लोकतंत्र नहीं है। विदेश में रहते हुए, वे भारत का अपमान करते हैं। अगर वे ऐसा करते रहे, तो भारत की जनता उन्हें पूरी तरह से नकार देगी। वे न तो सीटें जीत पाएंगे और न ही जनता का विश्वास जीत पाएंगे। वे चीन की भी तारीफ करते हैं, चीन के प्रति उनका लगाव जगजाहिर है, और भारत का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उन्हें विदेशी धरती से बिना किसी शर्म के भारत का अपमान करते देखना बेहद दुखद है। विजयादशमी के इस अवसर पर, मैं प्रार्थना करता हूं कि भारत और अधिक शक्तिशाली बने, और सभी आध्यात्मिक शक्तियां और देवता हमारे महान राष्ट्र को आशीर्वाद दें।"
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा, "भारत में इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में मजबूत क्षमताएं हैं, इसलिए मैं देश को लेकर बहुत आशावादी हूं। लेकिन साथ ही, ढांचे में कुछ खामियां भी हैं जिन्हें भारत को ठीक करना होगा। सबसे बड़ी चुनौती भारत में लोकतंत्र पर हो रहा हमला है।"
कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि विविधता के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था महत्वपूर्ण है, जो धार्मिक मान्यताओं सहित विभिन्न परंपराओं, रीति-रिवाजों और विचारों को पनपने देती है। उन्होंने कहा, "भारत में कई धर्म, परंपराएं और भाषाएं हैं। वास्तव में, यह देश अनिवार्य रूप से इन सभी लोगों और संस्कृतियों के बीच एक संवाद है। विभिन्न परंपराओं, धर्मों और विचारों को जगह की आवश्यकता होती है, और उस जगह को बनाने का सबसे अच्छा तरीका लोकतांत्रिक व्यवस्था है।" उन्होंने आगे कहा, "वर्तमान में, इस लोकतांत्रिक व्यवस्था पर व्यापक हमला हो रहा है, और यह एक बड़ा खतरा है। एक और बड़ा खतरा देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न अवधारणाओं के बीच तनाव है। 16-17 प्रमुख भाषाओं और अनेक धर्मों के साथ, इन विविध परंपराओं को पनपने देना और उन्हें आवश्यक स्थान देना बहुत जरूरी है।"
ग्लोबल ऑर्डर में भारत के स्थान पर उन्होंने जोर देकर कहा कि नई दिल्ली का दृष्टिकोण साझेदारी का है, प्रभुत्व का नहीं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत खुद को दुनिया का नेतृत्व करने वाला मानता है। हम एक विशाल देश हैं, और हम साझेदारी में विश्वास करते हैं। हम इतने अहंकारी नहीं हैं कि यह मान लें कि हमें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। यह विचार कि भारत को दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए, भारत खुद को इस तरह नहीं देखता। हो सकता है कि चीन खुद को इस तरह सोचता हो।”
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 2 October 2025 at 17:41 IST