216 बच्चों की मौत, 26500 लोग घायल; 700 से ज्यादा घंटों से बिजली गुल... ईरान युद्ध में पिछले 30 दिनों में क्या-क्या हुआ? जानिए सबकुछ

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने चेतावनी देते हुए सख्त संदेश दिया कि अमेरिकी सैनिक अगर ईरान की मिट्टी पर कदम रखते हैं तो वह सिर्फ ताबूतों में ही लौटेंगे।

Iran-Israel War
Iran-Israel War | Image: AP/X

Iran War One Month: ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग भीषण हो चुकी है। इस जंग को एक महीना हो चुका है, लेकिन ईरान के तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। अब ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने US-इजरायल पर धोखेबाजी का आरोप लगाया है।

मोहम्मद बाघर गालिबफ ने हाल ही में कहा कि बातचीत का प्रस्ताव देकर अमेरिका जिस युद्धविराम को पाने की उम्मीद कर रहा है, उसे वो युद्ध से हासिल करने में नाकामयाब रहा। इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी देते हुए सख्त संदेश दिया कि अमेरिकी सैनिक अगर ईरान की मिट्टी पर कदम रखते हैं तो वह सिर्फ ताबूतों में ही लौटेंगे।

दुश्मन को सजा देने के लिए बेसब्र ईरान?

ईरान अपने सुप्रीम लीडर समेत सेना की तमाम बड़ी शख्सियत को खो चुका है। ऐसे में बदले की आग में तप रहे ईरान ने उनके खिलाफ जंग छेड़ने वाले दोनों देशों (अमेरिका और इजरायल) को कभी न भूलाने वाला दर्द देने की ठानी है।

गालिबफ यह भी कहते हैं, 'दुश्मन बातचीत का संदेश तो सरेआम भेजता है, लेकिन गुपचुप तरीके से जमीनी हमले की प्लानिंग करता है। वो इस बात से बेखबर है कि ईरानी फौज अमेरिकी सैनिकों के जमीन पर उतरने की बेसब्री से राह ताक रही है, जिससे की उन्हें ढेर किया जा सके। हम जमीनी कार्रवाई के दौरान आमने-सामने की जंग में उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को भी सजा देने के लिए बेसब्र है।'

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US-इजरायल का मुकाबला करने से क्या फायदा?

जंग के 30 दिन होने के बावजूद ईरान अमेरिका और इजरायल का डटकर मुकाबला करते हुए दुनिया को अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। इस एक महीने में ऐसे कई मौके देखने को मिले जब ईरानी नेताओं ने अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप को मुंहतोड़ जवाब दिया। 'क्या खोया और क्या पाया' की बहस के बीच तेहरान दुनिया को दिखाने में कामयाब रहा कि ईरान ने अमेरिका को कई दफा बैकफुट पर जाने को मजबूर किया। ईरान ने अमेरिका की बात न मानकर अपने सहयोगियों (चीन-रूस) की महत्वाकांक्षाओं को भी बढ़ाया है।

ईरान ने किस-किसको बनाया निशाना?

खास बात ये है कि ईरान ने न सिर्फ यूएस-इजरायल की सेना को निशाना बनाया, बल्कि उनके मिडिल ईस्ट में मौजूद मिलिट्री बेसों को भी भारी-भरकम नुकसान पहुंचाने में सफलता पाई है। इसके अलावा ईरान ने उन खाड़ी देशों को भी बड़ा सबक सिखाया जो किसी न किसी तरह से अमेरिका की मदद कर रहे थे।

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वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने यूएई की 530 अरब डॉलर संपत्ति जब्त कर ली है। कारण ईरान के ताबड़तोड़ हमले बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स हैं कि यूएई सरकार ने 99 साल की रेसिडेंसी के वादे के बाद भी गोल्डन वीजा सहित सभी रेसे निवास परमिट रद्द कर दिए।

देश में मृतकों का आंकड़ा कितना पहुंचा?

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, देश में मृतकों का आंकड़ा 2,076 तक जा पहुंचा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से 30वें दिन का आंकड़ा जारी किया गया है। इसमें मृतकों की संख्या 2,076 बताई गई है, जिसमें 216 बच्चों भी शामिल बताए गए हैं। वहीं घायलों की संख्या 26,500 बताई गई, जिसमें 1,767 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा कुल 336 स्वास्थ्य और आपातकालीन केंद्रों को क्षति पहुंची है।

इंटरनेट ब्लैकआउट के एक महीने पूरे 

अमेरिका और इजरायल ने पिछले महीने यानी 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त कार्रवाई की थी। तभी से ईरान में इंटरनेट सेवा बंद है। इससे देश की लगभग 9 करोड़ आबादी का संपर्क बाहरी दुनिया से टूटा हुआ है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेट ब्लॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के एक महीने पूरे हो गए हैं। इसके चलते ऑनलाइन शॉपिग से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया तक ठप पड़ा हुआ है। अब भी हालात सामान्य होने के संकेत नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति 28 फरवरी को ईजरायल-यूएस के किए गए हमले के बाद और ज्यादा गंभीर हुई है। सुरक्षा कारणों के साथ-साथ सूचना के प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इंटरनेट या डिजिटल ब्लैकआउट किया गया है। 

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Published By :
Priyanka Yadav
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