EXPLAINER/ ड्रैगन ने अमेरिका की यहां दबोच रखी है गर्दन... भारत को धमकी देने वाले डोनाल्ड ट्र्ंप की चीन के सामने क्यों बंधी है घिग्घी?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों भारत के खिलाफ जहर उगलने में अपना ज्यादा वक्त बिता रहे हैं, जबकि चीन के प्रति उनका रवैया सॉफ्ट पड़ता जा रहा है।

Donald Trump-Jinping-PM Modi
डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग-पीएम मोदी | Image: ANI/AP

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों भारत के खिलाफ जहर उगलने में अपना ज्यादा वक्त बिता रहे हैं, जबकि चीन के प्रति उनका रवैया सॉफ्ट पड़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के इलेक्शन कैंपेन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की बातों में ये साफ झलकता था कि वो राष्ट्रपति की कुर्सी पर लौटते ही चीन के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ेंगे, और उन्होंने ये करने की कोशिश भी की। हालांकि, बीजिंग ने उन पर ऐसा वार किया कि उन्हें ये महसूस हो गया कि चीन से दुश्मनी लेना उनके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।

इलेक्शन कैंपेन के दौरान ट्रंप ने भारत और रूस को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया था, लेकिन कुर्सी पर लौटते ही उन्होंने इन दोनों देशों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया। सवाल ये है कि आखिर ट्रंप के तेवर चीन के लिए नरम कैसे पड़ गए और वो भारत और रूस के पीछे क्यों पड़ गए। इस आर्टिकल में हम इसके पीछे की वजह पर चर्चा करेंगे।

जानकार भी कर रहे ट्रंप की आलोचना

दुनियाभर के जानकार बताते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की पॉलिसी भारत-अमेरिका संबंधों को पूरी तरह से बिगाड़ सकती है। भारत-अमेरिका संबंधों पर अपनी पैनी नजर रखने वाले पूर्व उप-सहायक विदेश मंत्री इवान ए. फेगेनबाम ने एक आर्टिकल में लिखा कि दिल्ली और वाशिंगटन के बीच दशकों से बने रिश्ते को अमेरिकी राष्ट्रपति खत्म करने पर तुले हैं।

इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र में पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी चिंता व्यक्त की और ट्रंप की व्यापार नीति में स्पष्ट असमानता की ओर इशारा किया। उन्होंने रूसी तेल पर ट्रंप के दोहरे रवैये की भी कड़ी आलोचना की और बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को रूस से तेल न खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जबकि दूसरी ओर, चीन, जो रूसी और ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, को 90 दिनों के लिए टैरिफ पर रोक लगा दी जाती है।

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भारत के साथ रिश्ते कैसे बिगाड़ रहे ट्रंप?

अमेरिकी मीडिया में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा था कि हम दवाइयों पर भी टैरिफ लगाएंगे। शुरुआत हम कम टैरिफ से करेंगे, लेकिन धीरे-धीरे सालभर में ये 150 प्रतिशत और फिर 250 प्रतिशत हो जाएगा। इसका कारण ये है कि वो चाहते हैं कि दवाइयां उनके देश में ही बने। अब उन्होंने पिछली रात ये भी कहा कि वो 24 घंटे में भारत पर नए टैरिफ की घोषणा करेंगे।

अब आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं। साल 2024 में ही अमेरिका का चीन के साथ व्यापारिक घाटा 295 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि भारत के साथ ये केवल 46 बिलियन डॉलर था। इसके बावजूद ट्रंप को चीन की जी हुजूरी करने में मजा आ रहा है और वो भारत को टारगेट करने से बाज नहीं आ रहे।

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बीजिंग के खिलाफ नरम क्यों पड़ गए ट्रंप के तेवर?

राष्ट्रपति की कुर्सी पर वापस आने के बाद ट्रंप ने चीन पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। इसके बाद चीन ने अमेरिका पर दूसरी तरफ से शिकंजा कसना शुरू किया। अमेरिकी मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग ने अमेरिका को दुर्लभ खनिजों की सप्लाई रोक दी। आपको बता दें कि अमेरिकी रक्षा प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले 80 हजार से ज्यादा पुर्जे उन खनिजों से बनते हैं। इससे ट्रंप की हवा टाइट हो गई और उन्होंने तुरंत टैरिफ को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया।

इसके अलावा, फाइटर जेट हो या मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अमेरिका से चीन बहुत आगे हैं। इसके अलावा, चीन ने जर्मेनियम, गैलियम और एंटीमनी की बिक्री पर भी अमेरिका पर प्रतिबंध का ऐलान कर दिया, जिससे सैनिकों को रात में देखने में मदद मिलती है। यही वो वजहे हैं, जिनके कारण डोनाल्ड ट्रंप चीन के सामने मिमियाने को मजबूर हो गए हैं।

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Published By :
Kunal Verma
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