अपडेटेड 13 February 2026 at 19:18 IST

ईरान पर 'काल' बनकर बरसेगा अमेरिका! जिस जंगी जहाज ने वेनेजुएला को झुकाया, अब उसे मिडिल ईस्ट में तैनात करेंगे ट्रंप; क्या है प्लान?

न्यूक्लियर डील पर चल रही बातचीत के बीच अब अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी कर रहा है।

USS Gerald R. Ford, an US nuclear aircraft carrier
USS Gerald R. Ford, an US nuclear aircraft carrier | Image: X

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को बख्सने के मूड में नहीं हैं। न्यूक्लियर डील पर चल रही बातचीत के बीच अब अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी कर रहा है।

आपको बता दें कि जनवरी के आखिरी हफ्ते में ट्रंप ने यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी मिडिल ईस्ट में तैनात कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को धमकी भी दी थी कि अगर ईरान के साथ बातचीत फेल होती है तो इसका अंजाम सबसे खतरनाक होगा।

वेनेजुएला को झुकाने में काम आया था ये एयरक्राफ्ट

अमेरिकी मीडिया के अनुसार, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को पहले मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया था, लेकिन फिर वेनेजुएला के ऑपरेशन के लिए इसे कैरेबियन सागर में भेज दिया गया था। वेनेजुएला के ऑपरेशन में इसी एयरक्राफ्ट से फाइटर जेट्स को लॉन्च किया गया था।

ट्रंप ने पहले ही दिया था संकेत

ऐसा लगता है कि यह ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी से भी अलग है, जिसमें दुनिया के दूसरे हिस्सों के बजाय वेस्टर्न हेमिस्फेयर पर ज्यादा जोर दिया गया है। ईरान और अमेरिका ने पिछले हफ्ते ओमान में अप्रत्यक्ष बातचीत की।

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ईरान के साथ उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम पर डील करने की टाइमलाइन के बारे में एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि अगले महीने तक, कुछ ऐसा ही होगा। यह जल्दी होना चाहिए। उन्हें बहुत जल्दी सहमत हो जाना चाहिए।" ट्रंप ने इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी मीडिया को बताया कि वह मिडिल ईस्ट में दूसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने पर विचार कर रहे हैं।

'बातचीत जारी रखने की जरूरत'

ट्रंप ने बुधवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ लंबी बातचीत की और कहा कि उन्होंने इजराइल के नेता से जोर देकर कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखने की जरूरत है। नेतन्याहू ट्रंप प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि वह तेहरान पर अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को कम करने और किसी भी डील के हिस्से के तौर पर हमास और हिज्बुल्लाह जैसे मिलिटेंट ग्रुप्स को अपना सपोर्ट खत्म करने के लिए दबाव डाले।

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अब तक यह साफ नहीं है कि जहाज मिडिल ईस्ट में कितने समय तक रहेगा, लेकिन इस कदम से क्रू को आम तौर पर लंबी तैनाती के लिए तैयार किया गया है।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 13 February 2026 at 19:18 IST