Donald Trump: शांति वार्ता फेल होने के बाद अब ट्रंप के निशाने पर चीन, दे डाली बड़ी वार्निंग; कहा- अगर ईरान को हथियार भेजा दो अंजाम...

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ड्रैगन को एक बार फिर निशाने पर लिया है। ईरान युद्ध के चलते तेल-गैस संकट से जूझ रहे चीन को बड़ी चेतावनी दी है।

Did China Broker the US-Iran Ceasefire? Beijing’s Quiet Diplomacy Before Trump-Xi Meeting
ट्रंप के निशाने पर चीन, दे डाली बड़ी वार्निंग | Image: X

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले से आ रहे संघर्ष के स्थाई समाधान की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच चली 21 घंटे की महत्वपूर्ण शांति वार्ता पूरी तरह विफल हो गई है। इससे वैश्विक स्तर पर यह आशंका मजबूत हो गई है कि अमेरिका-ईरान युद्ध फिर से भीषण रूप ले सकता है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को बड़ी चेतावनी देकर चिंता और बढ़ा दी है।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ड्रैगन को एक बार फिर निशाने पर लिया है। ईरान युद्ध के चलते तेल-गैस संकट से जूझ रहे चीन को बड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप के बयान से चर्चा यह भी शुरू हो गई है कि क्या अमेरिका की तरफ से एक बार फर 'टैरिफ बम' फोड़ा जाएगा।

ट्रंप की चीन को सख्त चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को सख्त चेतावनी जारी की है। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने साफ कहा, 'अगर चीन ईरान को हथियार भेजता है तो उसके लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। ट्रंप ने कहा, 'ईरान के साथ हमारी गहरी बातचीत जारी है। समझौता हो या न हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आखिर में जीत अमेरिका की ही होगी। मगर चीन अगर मदद के लिए ईरान की तरफ हाथ बढ़ाया तो उसके लिए दिक्कत हो जाएगी।'

ईरान को मदद बर्दाशत नहीं करेगा अमेरिका

ट्रंप ने चीन के संभावित हस्तक्षेप पर अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि ईरान को हथियारों की आपूर्ति अमेरिका की सुरक्षा और चल रही बातचीत दोनों के लिए बड़ी बाधा होगी। आने वाले समय में चीन को बड़ी समस्याएं हो जाएगी।

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ईरान-अमेरिकी की शांति वार्ता विफल

बता दें कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू की थी। दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर को कैसे आगे बढ़ाया जाए। युद्ध को स्थाई रूप से कैसे रोका जाए। इस पर कोई अंतिम फैसला लेना था, मगर यह बातचीत असफल रही। 

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Published By :
Rupam Kumari
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