क्या भारत पर भी लगेगा 100% टैरिफ? अमेरिकी संसद में रूस पर प्रतिबंध वाला बिल पास, अब गेंद ट्रंप के पाले में
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास कर दिया है। अब यह बिल कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भेजा जाएगा।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read

US House Passes Russian Sanctions Bill: अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल को पास कर दिया है। इससे डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ लगाने की खुली छूट मिल जाएगी।
दरअसल, अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेटेटिव्स ने बुधवार को रूस के अधिकारियों और आर्थिक क्षेत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले बिल को मंजूर कर लिया। हाउस में बिल के पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोट पड़े। अब इस बिल को व्हाइट हाउस भेजा जाएगा। इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा।
इसे आधिकारिक तौर पर साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नाम दिया गया है। लिंडसे के सम्मान में लाए गए इस बिल को एक साल से ज्यादा समय तक चली बातचीत के बाद तैयार किया गया था।
भारत-चीन पर लटकी 100% टैरिफ की तलवार!
इस बिल का असर (100% टैरिफ) भारत और चीन सहित उन सभी देशों पर पड़ सकता है जो रूस से भारी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत भी इन प्रमुख खरीदारों में शामिल है, इसलिए अमेरिका और रूस के बीच बढ़ती तनातनी का सीधा असर अब भारत पर भी देखने को मिल सकता है।
Advertisement
हाउस में हुई बहस में भारत और चीन की पहचान उन प्रमुख खरीदारों के रूप में की गई, जिन पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है।
बिल के समर्थकों का तर्क
इस बिल के समर्थकों ने तर्क दिया कि टैरिफ की धमकी रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों को अपनी खरीद पर फिर विचार करने पर मजबूर करेगी। साथ ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर आर्थिक दबाव बनाएगी।
Advertisement
हाउस में इस कानून को आगे बढ़ाने वाले रिपब्लिकन कांग्रेसी माइकल मैककॉल का कहना है कि इस फैसले का मकसद मॉस्को पर अधिकतम दबाव बनाना है, ताकि पुतिन यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता चुनने पर मजबूर हों।
अमेरिका का असल मकसद क्या?
अमेरिका का असल मकसद भारत को टारगेट करना नहीं है, बल्कि उसके निशाने पर रूस है। अमेरिका का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बनाना है, ताकि उसे यूक्रेन युद्ध से पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके। ऐसे में इस बिल के तहत रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र को चोट पहुंचाना है। इसके अलावा रूस के उस 'शैडो फ्लीट' पर भी कार्रवाई का रास्ता बनाया गया है जिसमें ऐसे टैंकर शामिल हैं जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।
हालांकि, वोटिंग का मतलाब भारतीय सामानों पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होना नहीं है। इसके बजाय, अगर यह कानून बन जाता है और बाद में ट्रंप इसे लागू करते हैं, तो यह बिल एग्जीक्यूटिव ब्रांच को तय कानूनी शर्तों के तहत ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।