'ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह तबाह', चीन के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप का बयान; जिनपिंग के साथ बिगड़ेगी बात?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फिर दावा किया कि ईरानी सेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है और अमेरिका यह जंग "शांति से या किसी और तरीके से" जीत लेगा। उन्होंने चीन रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं।

Donald Trump
Donald Trump | Image: ANI

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फिर दावा किया कि ईरानी सेना पूरी तरह खत्म हो चुकी है और अमेरिका यह जंग "शांति से या किसी और तरीके से" जीत लेगा। उन्होंने चीन रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ये बातें कहीं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान के मामले में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दखल की उम्मीद करते हैं, तो ट्रंप ने कहा, "नहीं, मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के मामले में किसी मदद की जरूरत है। हम इसे किसी न किसी तरह जीत ही लेंगे। हम इसे शांति से या किसी और तरीके से जीतेंगे। उनकी नौसेना खत्म हो चुकी है, उनकी वायुसेना खत्म हो चुकी है, उनकी युद्ध मशीन का हर एक हिस्सा खत्म हो चुका है।"

'वह देश सैन्य रूप से हार चुका'

ईरान पर एक और सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने आगे कहा कि वह देश सैन्य रूप से हार चुका है और, "वे या तो सही काम करेंगे या फिर हम उनका काम तमाम कर देंगे।"

US के राष्ट्रपति ने इस नाकेबंदी को "100% असरदार" भी बताया। उन्होंने मीडिया से कहा, "यह नाकेबंदी बहुत असरदार है; यह 100% असरदार रही है। और किसी न किसी तरह, इसका नतीजा बहुत अच्छा निकलेगा। मुझे लगता है कि आपके पास इतना तेल होगा, तेल का ऐसा जबरदस्त भंडार होगा जैसा पहले कभी नहीं था।"

Advertisement

उन्होंने NATO की भी आलोचना की और इसे निराशाजनक बताया। ट्रंप ने कहा, "NATO मेरे लिए बहुत निराशाजनक रहा। जब हमें NATO की जरूरत थी, तब वह हमारे साथ नहीं था। हमें NATO की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर हमें उनकी जरूरत होती भी, तो भी वे हमारे साथ नहीं होते।"

NATO के सेक्रेटरी जनरल का बयान

इस बीच, NATO के सेक्रेटरी जनरल मार्क रुटे ने पहले इस सैन्य गठबंधन के लंबे समय तक चलने को लेकर गहरा भरोसा जताया था, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ईरान से जुड़ा बढ़ता संकट इस समय वैश्विक सुरक्षा एजेंडे में सबसे ऊपर है। एक रिपोर्ट के अनुसार, NATO के सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि तात्कालिक रणनीतिक चिंताएं समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित हैं।

Advertisement

ये चर्चाएं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच हो रही हैं, जिसमें NATO के सदस्य महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा में अपनी भूमिका पर विचार कर रहे हैं। यह गठबंधन अब अपने यूरोपीय सदस्यों की इस सामूहिक जिम्मेदारी पर ज्यादा ध्यान दे रहा है कि वे क्षेत्रीय तनाव वाले इलाकों को कैसे संभालें।

इन तात्कालिक भू-राजनीतिक बाधाओं के बावजूद, रुटे इस गुट की आंतरिक स्थिति और वित्तीय प्रतिबद्धता को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा, "जब NATO के भविष्य से जुड़े ज्यादा बुनियादी सवाल की बात आती है, तो मैं बहुत ज्यादा आशावादी हूं।"

ये भी पढ़ेंः कोरोना की तरह खतरनाक हो जाएगा हंता? अबतक 9 संक्रमितों की पहचान

Published By :
Kunal Verma
पब्लिश्ड