अपडेटेड 10 March 2026 at 08:14 IST
Iran-Israel War: क्या ईरान-इजरायल युद्ध हो जाएगा खत्म? आधी रात ट्रंप-पुतिन ने फोन पर की 1 घंटे तक गुपचुप बात...रूस ने बताया प्लान
ईरान-इजरायल जंग को लेकर बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फोन पर 1 घंटे बात हुई है। इस दौरान युद्ध खत्म करने का प्लान शेयर किया गया। जानें दोनों नेताओं के बीच क्या खास बातचीत हुई।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Trump-Putin Call on Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच चल रही जंग के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार (10 मार्च) को फोन पर लंबी बातचीत की। क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, यह दिसंबर के बाद दोनों नेताओं की पहली बातचीत थी, खबरें मिल रही है कि दोनों के बीच करीब घंटे बातचीत चली।
बताया जा रहा है कि पहल अमेरिका की तरफ से हुई थी। यह कॉल ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान रूस का करीबी सहयोगी है, जबकि अमेरिका इजरायल का समर्थक है। यूरी उशाकोव के मुताबिक, बातचीत को बहुत अहम बताया गया है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
एक घंटे इन मुद्दों पर बातचीत
फोन पर बात होते हुए ईरान जंग पर पूरा फोकस रहा, पुतिन ने ट्रंप को युद्ध तुरंत खत्म करने का प्लान शेयर किया है। उन्होंने राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से समाधान निकालने के विचार रखे। इसमें खाड़ी देशों के नेताओं, ईरान के राष्ट्रपति और अन्य देशों से हुए संपर्क शामिल थे। ट्रंप ने अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन के बारे में अपना आकलन पेश किया। उशाकोव ने कहा कि दोनों के बीच यूक्रेन संघर्ष का भी जिक्र हुआ।
ट्रंस ने पुतिन के प्रयारों की सराहना की
बातचीत के दौरान ईरान के अलावा यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हुई। ट्रंप का मानना है कि यूक्रेन विवाद का जल्द अंत अमेरिका के हित में है, जिसमें युद्धविराम और लंबे समय का समझौता शामिल हो। इसके बाद पुतिन ने ट्रंप के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की। दोनों नेताओं ने वेनेजुएला की स्थिति पर भी चर्चा की, खासकर वैश्विक तेल बाजार के संदर्भ में दोनों के बीच बात हुई। उशाकोव ने कॉल को गंभीर बताया। पिछले साल अगस्त में अलास्का में दोनों की मुलाकात हुई थी।
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यह कॉल भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ईरान से तेल आयात और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है। यह बातचीत शांति की दिशा में एक कदम हो सकती है।
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Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 10 March 2026 at 08:14 IST