धरती से अस्तित्व ही मिटा देंगे अगर... समुद्री बारूदी सुरंगों को टारगेट कर अमेरिका ने ईरान पर दागी मिसाइल, चेतावनी देते हुए ट्रंप ने लिया बदला
हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लेकिन इस बीच अमेरिका ने ईरान पर 24 घंटे में दूसरी बार बड़ा हमला कर दिया है। इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा कि अगर ईरान सीजफायर तोड़ता रहा तो अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और तेज होगी। ऐसी स्थिति में 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान' का अस्तित्व ही खत्म हो सकता है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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US Attack on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ शांति समझौता (Peace Deal) दो सप्ताह भी नहीं टिक सका। शनिवार को अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait) के पास स्थित ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। इस हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो अमेरिकी सेना अपने अभियान को पूरी तरह अंजाम देगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ऐसी स्थिति में 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान' का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी। लेकिन अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच फिर से तनाव चरम पर पहुंच सकता है।
अमेरिकी सेना ने क्यों की कार्रवाई?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिका की ओर से की गई यह कार्रवाई ईरान के युद्धविराम समझौते के लगातार उल्लंघन के जवाब में की गई है। अमेरिका ने दावा किया है कि गुरुवार को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास मालवाहक जहाज एवर लवली पर हमला किया था। इसी हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी।
24 घंटे में दूसरी बार ईरान पर हमला
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का आरोप है कि इसके बावजूद शनिवार सुबह एक अन्य तेल टैंकर/ M/T Kiku पर ड्रोन से अटैक युद्धविराम का उल्लंघन किया गया। CENTCOM के मुताबिक, यह टैंकर दो मिलियन यानी की लगभग 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज के पास से गुजर रहा था, तभी उसे निशाना बनाया गया। इसी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर ईरानी ठिकानों को 24 घंटे में दूसरी बार निशाना बनाया गया।
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किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
अमेरिका सेना का दावा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर,सैन्य निगरानी केंद्र, संचार प्रणाली, रडार साइट और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने से जुड़े ठिकानों को टारगेट किया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों का मकसद जाहिर तौर पर ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था।
ट्रंप ने वजूद मिटाने की दे डाली धमकी
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'अमेरिका के विमानों ने अभी-अभी ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोर करने की जगहों और तटीय रडार साइटों पर हमला किया है, क्योंकि उन्होंने फिर से सीजफायर समझौते का उल्लंघन किया है! बहुत मुमकिन है कि वे कभी नहीं सीखेंगे! एक समय ऐसा आ सकता है जब हम और समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को मिलिट्री के जरिए पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत कामयाबी से शुरू किया था। अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!'
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दक्षिणी ईरान में भी तेज धमाकों की आवाजें
वहीं ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने सैन्य सूत्र के हवाले से बताया कि दक्षिणी शहर सिरिक और केश्म द्वीप के पास कई तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कई प्रोजोक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए। हालांकि, अभी इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई है।