रिश्तों में तल्खी होगी दूर... ईरान युद्ध के बाद ट्रंप-नेतन्याहू की होगी पहली मुलाकात, बनाएंगे सीक्रेट प्लान?

ट्रंप और नेतन्याहू मंगलवार को वाशिंगटन में मिलेंगे। यह ईरान युद्ध के बाद उनकी पहली मुलाकात है। दोनों देश आपसी रिश्ते सुधारना चाहते हैं। ट्रंप युद्ध खत्म कर अर्थव्यवस्था बचाना चाहते हैं, नेतन्याहू ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहते हैं।

Donald Trump Benjamin Netanyahu Meeting An opportunity to bridge rift in relations following Iran war
ट्रंप-नेतन्याहू की होगी मुलाकात | Image: AP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मंगलवार को व्हाइट हाउस में महत्वपूर्ण मुलाकात हो रही है। 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक है।

यह बैठक दोनों नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों की खबरों के बीच हो रही है। दोनों नेताओं पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है। नेतन्याहू आने वाले चुनावों का सामना कर रहे हैं और ट्रंप से उनके रिश्तों में खटास उनके लिए चुनौती बन गई है। वहीं ट्रंप एक अलोकप्रिय युद्ध को खत्म करने के दबाव में हैं, जिसने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है और मंहगाई बढ़ा दी है। नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले यह मुद्दा महत्वपूर्ण है।

शुरुआत में दोनों नेता ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने के लक्ष्य पर एकजुट नजर आ रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे युद्ध बढ़ा, स्थिति बदल गई। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा और तेल की कीमतें ऊपर चढ़ गईं।

युद्ध को लेकर मतभेद

ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते पहले भी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद शुरुआत में दोनों बहुत करीब दिखे। फरवरी में उन्होंने मिलकर ईरान पर हमला किया। मकसद था ईरान के नेतृत्व को कमजोर करना और वहां पश्चिम के अनुकूल सरकार बनने का रास्ता खोलना। दोनों नेताओं ने अपनी सेनाओं को एक साथ काम करते हुए दिखाया, लेकिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई की।

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ईरान ने अमेरिकी ठिकानों बनाया, खाड़ी के शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। होर्मुज बंद होने से ट्रंप पर घर और क्षेत्रीय सहयोगियों का दबाव बढ़ा कि युद्ध बंद किया जाए। नेतन्याहू युद्ध जारी रखना चाहते थे, खासकर ईरान और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ। लेकिन ट्रंप तेहरान से समझौता करने चल दिए। नतीजा यह हुआ कि इजरायल पीछे की सीट पर बैठ गया। ये संकेत माना गया कि युद्ध की कमान अमेरिका के हाथ में है। ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि-

"ईरान को लेकर दोनों में थोड़ा फर्क है, लेकिन वे काफी करीब हैं।"

मुलाकात में क्या चर्चा होगी?

नेतन्याहू-ट्रंप को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इजरायली खुफिया जानकारी देंगे। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि वे ट्रंप से सुनना चाहते हैं कि आगे क्या योजना है। उनका कहना है कि अगर बिना बड़े सैन्य संघर्ष के काम चल जाए तो ठीक है, लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म होना चाहिए। उन्होंने ईरान को चेतावनी भी दी कि अगर इजरायल पर हमला हुआ तो जवाब बहुत सख्त होगा। इसके अलावा दोनों लेबनान से जुड़े फ्रेमवर्क समझौते और अब्राहम समझौतों के विस्तार पर भी बात करेंगे।

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 Sagar Singh
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