"Whether They Like It Or Not...", ग्रीनलैंड पर कब्जा करेगा अमेरिका! डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-चीन का डर दिखाकर दी खुली धमकी
President Donald Trump ने व्हाइट हाउस में कहा कि "हम ग्रीनलैंड के मुद्दे पर कुछ न कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो।" रूस-चीन को रोकने के नाम पर उन्होंने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाए। इसपर ग्रीनलैंड के नेता एकजुट होकर बोले- "हमारा भविष्य हम तय करेंगे, कोई दखल नहीं।"
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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9 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अपना पुराना दावा दोहराया। उन्होंने खुली धमकी देते हुए कहा, "हम ग्रीनलैंड पर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे वे (डेनमार्क और ग्रीनलैंड वाले) इसे पसंद करें या न करें।" वहीं ग्रीनलैंड की ओर से भी जवाब आया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में नहीं लेगा, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे। वे नहीं चाहते कि उनके पड़ोस में रूस या चीन हों। ट्रंप ने कहा कि वे आसान तरीके से डील करना चाहेंगे, जैसे कोई समझौता करके खरीदना। लेकिन अगर आसान रास्ता नहीं निकला, तो कठिन तरीके से भी काम चलेगा। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि कठिन तरीका क्या होगा।
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड क्यों जरूरी?
ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए बहुत जरूरी मानते हैं। उनका कहना है कि यहां से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी, वहां खनिजों और बिजनेस के बड़े मौके हैं। व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस मामले में सैन्य विकल्प भी विचाराधीन हैं। ट्रंप ने डेनमार्क पर तंज कसते हुए कहा कि वे डेनमार्क के फैन हैं, लेकिन सिर्फ 500 साल पहले वहां जहाज उतरने से कोई देश उसका मालिक नहीं बन जाता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के भी कई जहाज वहां गए होंगे।
डेनमार्क प्रधानमंत्री की चेतावनी
डेनमार्क प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका बल प्रयोग करेगा, तो NATO का अंत हो जाएगा। ट्रंप ने इसका जवाब दिया कि वे NATO के बड़े समर्थक हैं। उन्होंने कहा, "मैंने ही NATO को बचाया है। अगर मैं न होता, तो आज NATO नहीं होता।" लेकिन फिर दोहराया कि रूस या चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करने देंगे।
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ग्रीनलैंड की ओर से साफ जवाब
10 जनवरी 2026 को (स्थानीय समयानुसार 9 जनवरी रात 8:30 बजे) ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा कि "हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, न ही डेनिश। हम ग्रीनलैंडर रहना चाहते हैं। ग्रीनलैंड का भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों के हाथ में है। कोई भी दूसरा देश इसमें दखल नहीं दे सकता। हम अंतरराष्ट्रीय कानून और सेल्फ-गवर्नमेंट एक्ट के अनुसार चलते हैं। हम अपने सहयोगियों से बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन सम्मान और कूटनीति के आधार पर। हम एकजुट हैं और अपने देश के अधिकारों की रक्षा करेंगे।"
बयान पर हस्ताक्षर करने वाले नेता
- जेंस फ्रेडरिक नील्सन (Demokraatit)
- पेले ब्रोबर्ग (Naleraq)
- मुटे बी. एगेडे (Inuit Ataqatigiit)
- अलेका हेमंड (Siumut)
- अक्कालु सी. जेरेमियासेन (Atassut)
यह पूरा विवाद फिर से गरमा गया है। ट्रंप की ये बातें 2019 से चल रही हैं, लेकिन अब 2026 में वे और तेज हो गई हैं। दुनिया भर में इसे लेकर चिंता है कि क्या यह NATO और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नुकसान पहुंचाएगा? ग्रीनलैंड के लोग साफ कह रहे हैं कि “ग्रीनलैंड, ग्रीनलैंड वासियों का है, और रहेगा।”