Iran US War: सीजफायर बढ़ने के बाद भी होर्मुज में बिगड़े हालात, ईरान ने तीसरे जहाज पर किया हमला; ट्रंप का क्या होगा एक्शन?
Iran US War Update: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा हुई, वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में मौजूद तीन व्यापारिक जहाजों पर धावा बोल दिया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 2 min read

Iran US War: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर इस समय युद्ध के बादल घने हो गए हैं। बुधवार को एक ओर जहां अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा हुई, वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में मौजूद तीन व्यापारिक जहाजों पर धावा बोल दिया। यह हमला वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हॉर्मुज में क्या हुआ?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, पहले एक कंटेनर जहाज पर चेतावनी दिए बिना फायरिंग की गई।
बाद में, IRGC नेवी ने आधिकारिक रूप से दो जहाजों 'MSC Francesca' और 'Epaminondas' को जब्त करने की पुष्टि की। इन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नेविगेशन सिस्टम में हेरफेर किया और समुद्री सुरक्षा को खतरे में डाला।
इसके अलावा, एक तीसरे ग्रीक जहाज 'Euphoria' को भी ईरानी तट के पास फंसे होने की सूचना है। ईरानी समाचार एजेंसियों का दावा है कि यह कार्रवाई समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
Advertisement
विफल हुआ ट्रंप के सीजफायर का फैसला
बता दें, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सीजफायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया था, ताकि शांति वार्ता का रास्ता खुल सके। हालांकि, इस फैसले का जमीनी असर नगण्य देखा जा रहा है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि जब तक अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की घेराबंदी (Blockade) जारी है, तब तक वह शांति वार्ता के लिए तैयार नहीं है।
ईरान इसे एक "कानूनी कार्रवाई" बता रहा है, जबकि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के लिए यह खुले तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन है। कूटनीतिक मोर्चे पर भी सन्नाटा पसरा है, क्योंकि ईरान ने अभी तक इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि नहीं की है।
Advertisement
समुद्री जंग का कितना असर?
होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (बेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 35 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने या महंगी होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजों और अन्य सामानों की ढुलाई भी महंगी हो गई है।