अपडेटेड 3 March 2026 at 16:50 IST

EXPLAINER/ Israel Iran War: इजरायल-ईरान युद्ध की चपेट में मिडिल ईस्ट के कौन-कौन से देश आए? ईरान क्यों कर रहा यहां ताबड़तोड़ हमले

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की चपेट में है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर किए गए हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं।

Iran Israel War
Iran Israel War | Image: Republic

मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की चपेट में है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर किए गए हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। इन हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक भूचाल ला दिया है।

अब यह संघर्ष केवल अमेरिका, इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाड़ी और आसपास के कई देश इसकी आग में घिरते जा रहे हैं। 

जानकारों का मानना है कि ईरान खाड़ी देशों पर इसलिए हमला कर रहा है, क्योंकि ये आसान है और अमेरिका को चोट देने का सबसे घातक तरीका है। उनका मानना है कि ये खाड़ी देश पलटकर उसपर हमला नहीं करेंगे। अगर वो हमला करते हैं तो युद्ध में उनकी सीधी भागीदारी मानी जाएगी, जो खाड़ी देशों के लिए खतरनाक हो सकती है।

हमलों के बाद तेज हुआ जवाबी एक्शन

अमेरिका और इजरायल का दावा था कि उनका अभियान ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने और उसकी सैन्य नेतृत्व क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया गया। लेकिन इसके तुरंत बाद ईरान ने सबसे तेज हमले वाले ऑपरेशन की चेतावनी देते हुए मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

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कुवैत में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों से मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। कई देशों में एयर-रेड सायरन, धमाकों और धुएं की खबरें सामने आई हैं।

हमले वाले प्रमुख US बेस

अल उदीद एयर बेस, कतर

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क्षेत्र का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य अड्डा, जो US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का अहम हेडक्वार्टर है। कतर ने एंटी-मिसाइल सिस्टम से कई मिसाइलें इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।

अल धाफरा एयर बेस, UAE

अबू धाबी स्थित इस बेस पर लगभग 5,000 अमेरिकी सैन्यकर्मी और एडवांस्ड उपकरण तैनात हैं। स्थानीय लोगों ने तेज धमाकों और धुएं की सूचना दी।

अली अल-सलेम एयर बेस, कुवैत

“द रॉक” के नाम से मशहूर यह बेस इराक बॉर्डर के पास स्थित है। आसपास धमाकों और एयर-रेड सायरन की आवाजें सुनी गईं।

NSA बहरीन

अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट का अहम नेवल कमांड सेंटर। मिसाइल हमलों के बाद मनामा में धुएं के गुबार देखे गए। कम से कम एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है।

मुवफ्फाक अल-साल्टी एयर बेस, जॉर्डन

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी मिसाइलों ने इस बेस को निशाना बनाया, हालांकि जॉर्डन की एयर डिफेंस ने दो मिसाइलों को मार गिराया।

ऐन अल-असद एयर बेस, इराक

पश्चिमी इराक स्थित इस बेस के पास धमाकों और धुएं की खबरें आईं।

एरबिल एयर बेस, इराक

हाई अलर्ट पर रखा गया यह बेस भी कई मिसाइल हमलों का निशाना बना।

कोनारक नेवल बेस, ईरान

सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, US-इजरायल हमलों के बाद यहां भारी नुकसान हुआ है।

युद्ध में शामिल देशों की बढ़ती लिस्ट

साइप्रस: RAF अक्रोटिरी पर एक संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ। राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने मामूली नुकसान की पुष्टि की।

UAE: दुबई और अबू धाबी में अशांति देखी गई। कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं।

कुवैत: अमेरिकी दूतावास ने अलर्ट जारी किया। एक F-15 फाइटर जेट क्रैश हुआ, हालांकि पायलट सुरक्षित बच निकला।

बहरीन: मीना सलमान पोर्ट और US फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई।

ओमान: दुकम पोर्ट पर ड्रोन हमले में एक वर्कर घायल हुआ।

लेबनान: इजरायल ने हिज्बुल्लाह से जुड़ी जगहों पर हमले तेज किए। हिज्बुल्लाह के संसदीय समूह के प्रमुख सहित कई लोग मारे गए।

सऊदी अरब: शाहेद-136 ड्रोन ने रास तनुरा स्थित सऊदी अरामको ऑयल फैसिलिटी को निशाना बनाया। रियाद में धमाकों की आवाजें सुनी गईं।

जॉर्डन: मिलिट्री ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें मार गिराने का दावा किया।

कतर: सूत्रों के मुताबिक, कतर को 44 मिसाइलों और 8 ड्रोन से निशाना बनाया गया।

आम लोगों पर असर

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) की चेतावनी के तुरंत बाद तेल अवीव में एयर-रेड सायरन बजने लगे। दुबई, दोहा और मनामा जैसे शहरों में भी धमाकों की गूंज सुनाई दी। कतर, बहरीन और UAE की राजधानियों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। बढ़ते संघर्ष के बीच होटल, एयरपोर्ट और अन्य नागरिक ठिकानों पर भी हमलों की खबरें हैं, जिससे आम लोगों में दहशत का माहौल है।

यह संघर्ष अब क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिख रहा है। कई देश गंभीर नतीजों की चेतावनी दे रहे हैं और इंटरनेशनल कानून के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं। कूटनीतिक प्रयास तेज हैं, लेकिन जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं।

मध्य पूर्व का यह नया संकट न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक सुरक्षा और तेल बाजार पर भी गहरा असर डाल सकता है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव सीमित रहेगा या एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में बदल जाएगा।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 3 March 2026 at 16:48 IST