पश्चिम एशिया संघर्ष में भारत को चुकानी पड़ी बड़ी कीमत, ईरानी और अमेरिकी हमलों में 13 भारतीयों ने गंवाई जान, 3 लापता; अबतक क्या-क्या हुआ?
पश्चिम एशिया का संघर्ष न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित कर रहा है। भारत ने बार-बार जोर दिया है कि संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता है। हमलों को रोकना, नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों को खुला रखना समय की मांग है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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फरवरी 2026 से पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में अब तक 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अन्य लापता हैं। मंगलवार (14 जुलाई) को विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने इसकी पुष्टि की है। भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना बताया गया। हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई सहित कई शीर्ष अधिकारियों की मौत हो गई।
ईरान ने इसकी जवाबी कार्रवाई में मिसाइलों और ड्रोनों से इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों पर हमले किए। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को प्रभावित किया, जो विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार का मार्ग है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई, तेल की कीमतें बढ़ीं और जहाजों की आवाजाही बाधित हुई।
भारतीय नागरिकों पर असर
यह संघर्ष केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा। इसमें कमर्शियल जहाजों पर हमले, तेल सुविधाओं को नुकसान और क्षेत्रीय देशों में अस्थिरता शामिल रही, जिसका सीधा असर उन हजारों भारतीयों पर पड़ा जो खाड़ी देशों (UAE, ओमान, सऊदी अरब आदि) में काम करते हैं या समुद्री मार्गों पर नाविक के रूप में कार्यरत हैं।
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फरवरी 2026 से अब तक अलग-अलग घटनाओं जैसे ओमान में ड्रोन हमले, सऊदी अरब में मिसाइल हमले और समुद्री मार्गों पर हुए हमलों में भारतीयों को नुकसान हुआ है। कुल मिलाकर 13 भारतीयों की जान गई और तीन लापता हैं।
जुलाई की घटना
होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों MT Al Bahiyah और MT Mombasa पर हमले हुए। इन जहाजों में कुल 46 चालक दल थे, जिनमें 30 भारतीय नाविक शामिल थे। हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। एक जहाज पर 9 भारतीय घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई। ये हमले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने वाले थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल उठे।
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भारत सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा- “हम पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हम होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध नेविगेशन के प्रवाह की मांग करते रहेंगे। यह दुनिया भर के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।”
भारत ने ईरान के उप राजदूत को बुलाकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और हमलों की कड़ी निंदा की। MEA ने कहा कि एक भारतीय की जान गई और कई घायल हुए। भारत ने इन हमलों को तुरंत रोकने की मांग की।
MEA ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए। मुक्त और सुरक्षित नेविगेशन को जल्द से जल्द बहाल किया जाए। दोनों पक्षों को बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।