'कलिनिनग्राद को अलग करने की कोशिश की तो परमाणु हथियार...', आर-पार के मूड में रूस; पुतिन की NATO को सीधी चेतावनी

रूसी दूतावास ने NATO को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मॉस्को, कलिनिनग्राद की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने को भी तैयार है।

Russian President Vladimir Putin
Russian President Vladimir Putin | Image: ANI

रूस ने नाटो (NATO) को स्पष्ट चेतावनी दी है कि कलिनिनग्राद क्षेत्र में किसी भी तरह की दखलंदाजी या इसे रूसी मुख्य भूमि से अलग करने की कोशिश सीधे सैन्य टकराव का कारण बन सकती है। रूसी दूतावास बेल्जियम ने यह संदेश नाटो के अंतरराष्ट्रीय सचिवालय और बेल्जियम विदेश मंत्रालय तक पहुंचाया है।  दूतावास ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि मॉस्को, कलिनिनग्राद की रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने को भी तैयार है।

कलिनिनग्राद पोलैंड और लिथुआनिया के बीच बाल्टिक सागर तट पर स्थित रूस का एक अलग-थलग क्षेत्र है। भौगोलिक रूप से यह रूसी मुख्य भूमि से जुड़ा नहीं है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से इसे रूस का ‘सैन्य किला’ माना जाता है। मॉस्को का कहना है कि इस इलाके की रक्षा के लिए उसके पास पर्याप्त हथियार हैं और जरूरत पड़ने पर वह अपने पूपरमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने को तैयार है।

रूस ने NATO को क्यों दी चेतावनी

रूस ने साफ किया कि कलिनिनग्राद को बाकी रूस से अलग करने की कोई भी कोशिश रूसी क्षेत्र के खिलाफ आक्रामकता मानी जाएगी। यह धमकी NATO द्वारा उत्तर-पूर्वी पोलैंड में कलिनिनग्राद के पास किए गए हवाई अभ्यास के करीब एक महीने बाद आई है। उस अभ्यास में अमेरिकी और नॉर्वेजियन लड़ाकू विमान, नाटो का ई-3ए सेंट्रि एवाक्स निगरानी विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर और अमेरिकी ईए-37बी इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान शामिल थे।

कलिनिनग्राद रूस के लिए क्यों जरूरी

अनुमान के मुताबिक इस हवाई अभ्यास में 25 से 50 विमान शामिल रहे। रूस अब नाटो की इन गतिविधियों को कलिनिनग्राद को मुख्य रूस से अलग-थलग करने की संभावना से जोड़ रहा है। बता दें कि कलिनिनग्राद ओब्लास्ट करीब 15,100 वर्ग किलोमीटर में फैला है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह क्षेत्र सोवियत संघ के नियंत्रण में आया और 1946 में इसका नाम कलिनिनग्राद रखा गया। आज यह रूस का पश्चिमी क्षेत्र है और चारों ओर नाटो देशों से घिरा हुआ है। यही वजह है कि यह इलाका लंबे समय से रूस और नाटो के बीच सुरक्षा तनाव का केंद्र बना हुआ है।

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NATO की कलिनिनग्राद पर नजर

रूस के लिए यह क्षेत्र सिर्फ एक भूभाग नहीं, बल्कि बाल्टिक सागर में उसकी सैन्य उपस्थिति का आधार है। यहां रूसी बाल्टिक फ्लीट का प्रमुख ठिकाना है। मिसाइल सिस्टम, रडार और अन्य सैन्य अवसंरचना भी मौजूद हैं। नाटो के लिए भी यह क्षेत्र संवेदनशील है, क्योंकि यहां तैनात रूसी सैन्य क्षमता बाल्टिक क्षेत्र में हवाई और समुद्री गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

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Published By:
 Rupam Kumari
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