पाकिस्तान के लिए UNGA में फील्डिंग करने वाले एर्दोगन को भारत ने दिखाया आईना, कहा- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, बाहरी का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं

भारत ने मंगलवार को तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन के जम्मू-कश्मीर के संदर्भ दी गई टिप्पणी को खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा अंदरूनी मामलों में बाहरी देशों का दखल बिल्कुल भी मंजूर नहीं है।

India slams Turkish President Erdogan's Kashmir remarks at UNGA
UNGA में पाकिस्तान के मददगार एर्दोगन को भारत की नसीहत, कहा-J&K अभिन्न अंग | Image: X/Republic

मंगलवार, 28 सितंबर को भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने को सख्ती से खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। भारत ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला पूरी तरह से देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है और किसी भी बाहरी देश की दखल बर्दाश्त के बाहर है। 

दरअसल, न्यूयॉर्क में एर्दोगन के भाषण के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली अपने आंतरिक मामलों में बाहरी पक्षों के किसी भी अनावश्यक हस्तक्षेप को पूरी तरह से खारिज करती है।

J&K भारत का अभिन्न अंग, बाहरी का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं-MEA

रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "भारत, UNGA में अपने संबोधन के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में की गई अनावश्यक टिप्पणियों को खारिज करता है। यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा है, और इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार या भूमिका नहीं है।"

एर्दोगन ने UNGA में कश्मीर बारे में क्या बोला था?

भारत की तरफ से यह कड़ी प्रतिक्रिया एर्दोगन के UNGA भाषण के बाद आई है, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत बातचीत की वकालत करते हुए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय विवादों का ज़िक्र किया था। संबोधन में एर्दोगन ने कहा था, "दक्षिण एशिया में यह जरूरी है कि कश्मीर मुद्दे समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के ढांचे के भीतर बातचीत के जरिए सुलझाया जाए। अगर रचनात्मक कदम उठाए जाएं, तो सभी मुद्दों को हल किया जा सकता है।"

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बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते

भारत ने हमेशा से जोर दिया है कि "बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते,"भारतीय अधिकारियों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कारगिल, 26/11, पठानकोट, पुलवामा और पहलगाम जैसी घटनाओं सहित शांति की पिछली कोशिशों के बाद भी सीमा पार से हुए आतंकवादी हमलों ने इस्लामाबाद पर यह ज़िम्मेदारी डाल दी है कि वह रचनात्मक कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू होने से पहले आतंकवादी ढांचे को खत्म करें।

वहीं, एर्दोगन की यह टिप्पणी तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब द्वारा 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ समय बाद आई है। नई दिल्ली ने अपनी पुरानी बात दोहराई कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। शिमला समझौते के तहत, भारत और पाकिस्तान दोनों ही किसी तीसरे पक्ष के दखल के बिना शांतिपूर्ण ढंग से द्विपक्षीय मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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Published By:
 Sahitya Maurya
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