सीमा वार्ता से सुरक्षा तक... ड्रैगन की मांद में घुसकर NSA अजीत डोभाल तय करेंगे भारत का एजेंडा

NSA अजीत डोभाल का ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब सितंबर में भारत में BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसका आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। चर्चा ये भी है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ सकते हैं। जहां पीएम मोदी से उनकी मुलाकात हो सकती है। ऐसे में अजीत डोभाल चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण देंगे, ताकि उनकी नई दिल्ली की ब्रिक्स यात्रा के दौरान PM मोदी के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए सकारात्मक वार्ता हो सके।

अजीत डोभाल का दो दिवसीय चीन दौरा क्यों है अहम?
अजीत डोभाल का दो दिवसीय चीन दौरा क्यों है अहम? | Image: ANI

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल चीन के विदेश मंत्री वांग यी के न्यौते पर सोमवार 24 अगस्त को बीजिंग पहुंचे हैं। दोनों नेता मंगलवार 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का 25वां दौर आयोजित करेंगे। लेकिन दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन से पहले अजीत डोभाल का ये दौरा भारत के दृष्टिकोण से काफी अहम है। ईरान अमेरिका युद्ध के कारण दुनिया भर में तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन दोनों को रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया था। ऐसे में भारत-चीन के संबंधों में मजबूती वैश्विक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है।

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन के विदेश मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य वांग यी के न्यौते पर, भारत-चीन सीमा मुद्दे पर भारत के विशेष प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार अजीत डोभाल सोमवार 24 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं। साथ ही डोभाल अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे।

भारत-चीन के बीच 25वें दौर की वार्ता

विदेश मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विशेष प्रतिनिधि विदेश मंत्री 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता के 25वें दौर की मेजबानी करेंगे। NSA डोभाल अपनी यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात जून में नई दिल्ली में ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भारत में हुई उनकी मुलाकात के कुछ ही समय बाद होगी।

रणधीर जायसवाल ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने X पर एक पोस्ट में बैठक का विवरण साझा करते हुए कहा, ' दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रमों की समीक्षा की और धीर-धीरे इस सामान्य बनाने की दिशा में हुई प्रगति पर ध्यान दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों पक्षों के बीच विश्वास और बेहतर समझ बनाने में योगदान देते हैं।

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दोनों देशों के संबंधों में सुधार की उम्मीद

यह दौरा नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। यह सुधार पिछले साल तियानजिन में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद हुआ है। जहां दोनों नेताओं ने अक्तूबर 2024 में कजान में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति और स्थिर प्रगति का स्वागत किया था।

उन्होंने इस बात की पुष्टि की थी कि दोनों देश विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंवी नहीं और उनके मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने नेताओं की बैठक के बाद एक बयान में कहा कि भारत और चीन तथा उनकी 28 अरब आबादी के बीच आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर स्थिर सबंध और सहयोग दोनों देशों के विकास के साथ-साथ 21वीं सदी के रुझानों के अनुरूप बहुध्रुवीय विश्व और बहुध्रुवीय एशिया के लिए आवश्याक है।

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अजीत डोभाल का दौरा क्यों है अहम?

बता दें कि NSA अजीत डोभाल का ये दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब सितंबर में भारत में BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसका आयोजन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। चर्चा ये भी है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ सकते हैं। जहां पीएम मोदी से उनकी मुलाकात हो सकती है। ऐसे में अजीत डोभाल चीनी राष्ट्रपति को निमंत्रण देंगे, ताकि उनकी नई दिल्ली की ब्रिक्स यात्रा के दौरान PM मोदी के साथ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिए सकारात्मक वार्ता हो सके।

मिडिल ईस्ट संकट और भारत-चीन संबध

बता दें कि ईरान अमेरिका युद्ध के कारण दुनिया भर में तनाव की स्थिति है। मिडिल ईस्ट संकट के कारण भारत-चीन के संबंध को मजबूती प्रदान करना दोनों देशों की प्राथमिकता होगी। क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट के कारण भारत और दुनिया के कई देशों में गैस और ईंधन की किल्लत हुई। इस बीच अमेरिका ने भारत और चीन दोनों को रूस से तेल खरीदने को लेकर आड़े हाथों लिया है। 

इस लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों देशों पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया। हालांकि बाद में दोनों देशों ने अपने-अपने लेवल पर अमेरिका से कूटनीति के तहत कई डील भी किए। ऐसे में वैश्विक अस्थिरता के बीच अगर दो पड़ोसी देश भारत और चीन के संबंध मजबूत होते हैं तो दोनों के विदेश नीति के लिए ये एक अहम पड़ाव होगा। 

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Published By:
 Sujeet Kumar
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