PAK आर्मी चीफ मुनीर को मौत के घाट उतारना चाहते थे नेतन्याहू, ईरान वार्ता के बीच मोसाद को दिया था ऑर्डर? ब्राजील के पत्रकार का सनसनीखेज दावा
जिनेवा की जिस बैठक में ईरान और अमेरिका के बीच पीस डील पर चर्चा चल रही थी, वहां से एक ऐसा दावा सामने आया जिसने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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जिनेवा की जिस बैठक में ईरान और अमेरिका के बीच पीस डील पर चर्चा चल रही थी, वहां से एक ऐसा दावा सामने आया जिसने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरीं। ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने आरोप लगाया कि इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को स्विट्जरलैंड में निशाना बनाने की योजना बनाई थी।
पत्रकार ने इस दावा में ये भी कहा कि मोसाद को ये ऑर्डर खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दिया था। हालांकि, पाकिस्तानी पत्रकारों ने इस दावे को सिरे से नकार दिया है।
ईरान डील के लिए स्विट्जरलैंड गया था पाकिस्तान डेलिगेशन
इन दिनों पाकिस्तान एक असामान्य कूटनीतिक भूमिका में है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए इस्लामाबाद ने बीच का रास्ता निकालने की पहल की। इसी सिलसिले में जिनेवा में उच्चस्तरीय बैठकें हुईं, जिनमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जैसे बड़े नाम भी शामिल थे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में गए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल में आसिम मुनीर भी थे।
दावा क्या है?
यह सनसनीखेज दावा आया मारियो नौफल के एक पॉडकास्ट से, जिसमें पेपे एस्कोबार मेहमान थे। एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सैन्य खुफिया को "बेहद विश्वसनीय सूत्रों" से पता चला था कि मोसाद, नेतन्याहू के इशारे पर, मुनीर और पूरे पाकिस्तानी दल को जिनेवा में खत्म करने की फिराक में था।
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एस्कोबार के अनुसार पाकिस्तान ने इसका जवाब भी दिया और मध्यस्थों के जरिए इजरायल को सीधे शब्दों में चेतावनी पहुंचाई गई कि प्रतिनिधिमंडल को हाथ लगाया तो इजरायल को "नक्शे से मिटा दिया जाएगा।" उनका कहना था कि यह मध्यस्थ संभवतः ओमान था।
आपको बता दें कि इस दावे को इजरायल या पाकिस्तान की तरफ से कन्फर्म नहीं किया गया है। ऐसे में इस दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती।
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मुनीर से क्यों नाराज है इजरायल?
यह बात जरूर सच है कि इजरायल ईरान-अमेरिका समझौते से नाखुश था। इजरायली नेताओं ने खुलकर कहा कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया। साथ ही लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई जारी रही, जिससे इस शांति प्रक्रिया पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे। इजरायल ने साफ कह दिया कि जब तक हिज्बुल्लाह का खतरा बना है, लेबनान में ऑपरेशन नहीं रुकेंगे।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इजरायल के खिलाफ काफी तीखे बयान दिए थे। उन्होंने इजरायल पर लेबनान में नरसंहार का आरोप लगाया और उसे "मानवता के लिए अभिशाप" तक कह दिया। जवाब में इजरायली अधिकारियों ने सवाल उठाया कि जिस देश के मंत्री इस तरह की भाषा बोलते हों, वह भला निष्पक्ष मध्यस्थ कैसे हो सकता है। यानी दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल था, यह सच है। लेकिन तनाव से हत्या की साजिश तक का सफर बहुत लंबा होता है।
पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्यों नकारा?
एस्कोबार के दावे को पाकिस्तान में ही सबसे पहले चुनौती मिली। डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इसे "बेबुनियाद" करार दिया। वरिष्ठ पत्रकार सैयद तलत हुसैन ने X पर लिखा कि इसमें "सच्चाई का एक अंश भी नहीं है" और ऐसा कुछ भी कभी हुआ ही नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी ने इस आरोप को "विकृत दुष्प्रचार" बताया।