Balendra Shah: नेपाल के सबसे युवा PM बनें बालेंद्र शाह, क्या है राम नवमी पर '1-2-3-4' पैटर्न? जिसके कारण शपथ ग्रहण के समय में हुआ बदलाव
नेपाल में हुए GenZ आंदोलन के बाद देश को अपना सबसे युवा प्रधानमंत्री मिल गया है। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने बालेंद्र शाह को शुक्रवार दोपहर 12:34 बजे पीएम पद की शपथ दिलाई। ज्योतिष गणना के अनुसार यह शुभ मुहूर्त राम नवमी और 1-2-3-4 अंक पैटर्न पर आधारित था।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Nepal PM Oath Ceremony: Ram Navami के शुभ दिन नेपाल में राजनीतिक इतिहास का एक अनोखा अध्याय लिखा गया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के नेता और रैपर-सिंगर बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं।
बालेंद्र शाह (35 साल) एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर, पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर हैं। उनकी पार्टी ने 5 मार्च 2026 को हुए संसदीय चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया और प्रतिनिधि सभा की लगभग दो-तिहाई सीटें जीत लीं। यह जीत पिछले सितंबर में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हुई, जिसमें पुरानी पार्टियों के खिलाफ गुस्सा फूटा था और दर्जनों लोग मारे गए थे।
खास मुहूर्त में ली शपथ
ये शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और सांस्कृतिक रूप से भी खास था। हिंदू पुरोहितों ने ज्योतिष गणना के अनुसार दोपहर 12:34 बजे को सबसे शुभ समय तय किया। यह समय राम नवमी के दिन पड़ रहा था और इसमें '1-2-3-4' का शुभ अंक पैटर्न भी शामिल था।
शाह बाद में दोपहर 2:15 बजे (14:15) अपने कार्यालय में प्रवेश करेंगे, जो '14-15' के शुभ पैटर्न को फॉलो करता है। नेपाल में हिंदू धर्म और ज्योतिष की गहरी परंपरा है। देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी हिंदू है और लोग नई शुरुआत, शादी या धार्मिक अनुष्ठान शुभ मुहूर्त पर ही करते हैं।
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शपथ ग्रहण समारोह में शंखनाद, हिंदू पुरोहितों और बौद्ध लामाओं द्वारा मंत्रोच्चारण जैसे पारंपरिक अनुष्ठान शामिल थे। राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने बालेंद्र शाह को शपथ दिलाई।
नई सोच वाले नेता को मौका
नेपाल की राजनीति लंबे समय से अस्थिरता और भ्रष्टाचार की मार झेल रही है। पुरानी पार्टियां जनता के बीच नाराजगी का शिकार बनीं। सितंबर के युवा आंदोलन ने सरकार गिरा दी। बालेंद्र शाह ने उस समय प्रदर्शनकारियों का सार्वजनिक समर्थन किया था, हालांकि वे खुद आंदोलन में शामिल नहीं हुए। यह चुनाव नेपाल के 3 करोड़ लोगों के लिए बदलाव का संकेत माना जा रहा है। युवा वोटरों ने नई सोच वाले नेता को मौका दिया है।
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बालेंद्र शाह का जन्म काठमांडू में हुआ, लेकिन वे भारत सीमा के पास तराई क्षेत्र से जुड़े हैं। उनकी पार्टी मात्र चार साल पुरानी है, फिर भी उसने भारी जीत दर्ज की। अब देखना होगा कि नई सरकार देश की पुरानी समस्याओं, राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार को कितना प्रभावी ढंग से सुलझा पाती है।