अपडेटेड 27 March 2026 at 12:22 IST

तेल और LPG के बाद वैश्विक खाद संकट, ईरान युद्ध से फर्टिलाइजर शॉर्टेज, खाद्य कीमतें बढ़ने का खतरा

ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक उर्वरक निर्यात ठप हो गया है। दुनिया के एक तिहाई उर्वरक व्यापार प्रभावित होने से भारत, केन्या, इथियोपिया समेत विकासशील देशों के किसान संकट में हैं।

Fertilizer Shortage Iran War Affects Farmers Worldwide Food prices are at risk of rising
ईरान युद्ध ने रोका उर्वरक निर्यात | Image: AP

ईरान में चल रही जंग के कारण दुनिया भर में खाद की कमी हो रही है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है और खाने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद जंग शुरू हुई। इसके जवाब में ईरान ने Strait of Hormuz को लगभग बंद कर दिया। यह खाड़ी दुनिया के तेल और खाद (Fertilizer) के व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है।

ईरान में चल रहे युद्ध ने तेल और LPG के बाद वैश्विक उर्वरक आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे दुनिया भर में उर्वरक संकट का खतरा मंडरा रहा है। खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा भी बढ़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाले उर्वरक विकासशील देशों के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। युद्ध शुरू होने के बाद शिपिंग में भारी कमी आई है, और बीमा लागत भी बढ़ गई है।

दुनिया के लगभग एक तिहाई खाद का सामान Strait of Hormuz से गुजरता है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल शिपमेंट का लगभग एक पांचवां हिस्सा और वैश्विक उर्वरक व्यापार का करीब एक तिहाई हिस्सा संभालता है। खासकर नाइट्रोजन और फॉस्फेट वाली खाद प्रभावित हुई है। वैश्विक स्तर पर यूरिया व्यापार में करीब 30% की कमी आ गई है। युद्ध खत्म होने के बाद भी पूर्ण आपूर्ति बहाल होने में समय लगेगा, क्योंकि सुरक्षा गारंटी और बढ़ी हुई लागत की जरूरत पड़ेगी।

किसानों पर क्या असर?

विकासशील देशों जैसे इथियोपिया, केन्या और अन्य अफ्रीकी देशों में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। इथियोपिया अपनी 90% से ज्यादा नाइट्रोजन खाद खाड़ी क्षेत्र से ही लाता है। भारत में छोटे किसान सबसे ज्यादा चिंतित हैं। सरकार इस साल यूरिया सब्सिडी पर करीब 12.7 अरब डॉलर खर्च करने जा रही है। अमेरिका और यूरोप में वसंत की बुआई का समय चल रहा है। खाद न मिलने से फसलें समय पर नहीं बढ़ पा रही हैं, जिससे पैदावार कम हो सकती है। अगर खाद समय पर न डाली जाए, तो अफ्रीका में मक्के की फसल पर 4% तक असर पड़ सकता है।

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क्यों हो रही है समस्या?

खाद बनाने के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत पड़ती है। जंग के कारण गैस की कीमतें बढ़ गई हैं और जहाजों का आना-जाना रुक गया है। बीमा की लागत भी बहुत बढ़ गई है। जंग खत्म होने के बाद भी सुरक्षा की चिंता बनी रहेगी, इसलिए सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा।

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के डिप्टी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्ल स्काउ कहते हैं, “सबसे खराब स्थिति में अगली फसल की पैदावार कम हो जाएगी या फसलें बर्बाद हो जाएंगी। सबसे अच्छी स्थिति में भी खाद महंगी होने से खाने के दाम बढ़ेंगे।”

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आगे क्या हो सकता है?

खाद की कमी से फसलें कम होंगी तो अनाज और अन्य खाने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। कई सरकारें खाद पर सब्सिडी बढ़ा सकती हैं, लेकिन इससे उनका बजट पर बोझ बढ़ेगा। यह मौका भी हो सकता है कि कम खाद वाली खेती या जैविक तरीके अपनाए जाएं, लेकिन मिट्टी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 27 March 2026 at 12:22 IST