आखिर देवभूमि नेपाल में क्यों आई त्रासदी? दोस्त चीन ने क्यों नहीं दी चेतावनी, फ्लैश फ्लड कैसे हो गया इतना खतरनाक?
कुदरत की तबाही का खौफनाक मंजर की दास्तां कहां तक बयां की जाए। सड़क अचानक दरिया बन गई। पानी का तेज बहाव इतना कि बीच में जो आया, बड़ी-बड़ी इमारत यहां तक कि पूरा गांव और शहर, उसे अपने में समेटते चला गया। नेपाल का रसुआ शहर तो डेढ़ मिनट ही बह गया। इस त्रासदी ने 2013 के केदारनाथ आपदा की यादें ताजा कर दी।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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नेपाल अपने इतिहास के सबसे भीषण त्रासदियों में से एक को झेल रहा है। सोशल मीडिया पर पड़ोसी देश नेपाल में आई बाढ़ के जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, उसे देखकर हर किसी का रूह कांप जा रहा है। नेपाल में बुधवार 26 अगस्त की सुबह-सुबह जब लोग उठे ही थे और काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे तो कुदरत के कहर ने उनका सब कुछ बरबाद कर दिया। कई फीट ऊंची लहरों के साथ ऐसा जल प्रलय आया कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं लगा और उनकी दुनिया उजड़ गई।
बाढ़ की ऐसी तबाही देख कर हर किसी का कलेजा फट रहा है। पहाड़ से अचानक पानी का सैलाब आता है। इसकी लहर में घर, मकान, दुकान, बाजार और बड़े-बड़े डैम तिनकों की तरह बह गए। भारत से जब हम नेपाल जाते हैं तो एक ब्रिज मिलता है, जिसे फ्रेंडशिप ब्रिज के नाम से जाना जाता है। ये ब्रिज पानी के तेज बहाव में ताश की पत्तों की तरह बह जाता है। सबसे ज्यादा यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वो खौफनाक मंजर, जब कुदरत के आगे सब फेल
वीडियों में दौड़ते लोग, डर से कांपती आवाज, एक दूसरे को चेतावनी देने वाले अचानक पानी में समा जाते हैं। जब हम अपनी आंखें बंद करते हैं तो वही खौफनाक मंजर बार-बार दिमाग को कुरेद देता है। तब हमें यही एहसास होता है कि इंसान कितना भी विकास कर ले कुदरत के आगे फेल है। जब ऊपर वाला विनाश करना चाहता है तो आपकी सारी टेक्नोलॉजी धरी की धरी रह जाती है।
कुदरत की तबाही का खौफनाक मंजर की दास्तां कहां तक बयां की जाए। सड़क अचानक दरिया बन गई। पानी का तेज बहाव बीच में जो आया, बड़ी-बड़ी इमारत यहां तक कि पूरा गांव और शहर को अपने में समेटते चला गया। नेपाल का रसुआ शहर तो डेढ़ मिनट ही बह गया। ऐसे में ये अंदाज लगाना मुश्किल है कि कितने लोगों की मौत हुई होगी और कितने बह गए होंगे।
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जल प्रलय में कितने लोगों की हुई मौत?
नेपाल के आपदा प्रबंधन के आंकड़ों के मुताबिक अबतक 359 लोगों को इस जलप्रलय ने निगल लिया और करीब 1000 लोग लापता हैं। इनमें करीब 288 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इनमें ज्यादातर लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए निकले थे। टूर ट्रैवल पैकेज लेकर भारत से कई दल वहां पहुंचा था। उनमें से कई से संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल के खौफनाक मंजर ने 2013 में भारत के केदारनाथ में आई आपदा की यादें ताजा कर दी।
नेपाल में सबसे भीषण त्रासदी आई कैसे?
अब सवाल है कि ये तबाही आई कैसे? सबसे पहले ये खबर सामने आई कि रिक्टर पैमाने पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया और इसके कारण ग्लेशियर का मलबा गिरा। इस कारण से अचानक पानी का सैलाब आया, लेकिन बाद में इस कारण को नकार दिया गया। फिर एक्सपर्ट्स ने इसे फ्लैश फ्लड बताया। जब अचानक और तेजी से बाढ़ आती है तो उसे फ्लैश फ्लड कहा जाता है। यह कम समय में भारी बारिश या ग्लेशियर या नदी के अवरोध टूटने से होती है। पानी का अचानक तेज बहाव आता है, इसलिए यह बहुत खतरनाक होता है।
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फ्लैश फ्लड इतना खतरनाक क्यों हो गया?
इसके मुताबिक करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटा। इसके बाद चट्टान और बर्फ का मलबा करीब 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा। पानी अपने साथ इन मलबों को ढोता हुआ और खतरनाक बन गया। फिर यह नेपाल की भोटेकोशी या त्रिशूली में गिरा। जिससे नदी का मार्ग अवरूद्ध हो गया। फिर अचानक पानी ने सबको तोड़ते हुए मलबे के साथ नीचे बढ़ा, जो और भी खतरनाक हो गया। बहाव के सामने जो कुछ आया उसे अपने में समेटते हुए नेस्तनाबूद करता चला गया।
नेपाल के दोस्त चीन ने क्यों नहीं दी चेतावनी?
नेपाल में भीषण तबाही के बाद वहां के कुछ नेता और पत्रकारों ने चीन को कठघड़े में खड़ा कर दिया। उनका मानना था कि टेक्नोलॉजी के मामले में चीन इतना विकसित होने के बाद भी नेपाल से सूचना क्यों नहीं साझा किया। हालांकि इस आरोप की नेपाल की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया।
बाद में चीन की ओर से आधिकारिक बयान में दावा किया गया कि चीन द्वारा नेपाल को समय पर चेतावनी ना देने से नुकसान हुआ, ये गलत है। नेपाल स्थित चीनी दूतावास के मुताबिक घटना इतनी अचानक थी कि वास्तविक समय में अलर्ट जारी करना मुश्किल था। सीमा इलाके में संपर्क टूट गया और दोनों तरफ के सुरक्षा कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो सका।