संकट में US Iran डील, भड़का इजरायल; नेतन्याहू के मंत्री की दो टूक- अमेरिका के गुलाम नहीं, हम दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेंगे क्योंकि...
इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना सीमा पर अपनी जगहों से पीछे नहीं हटेगी। नेतन्याहू के मंत्री ने अमेरिका की अगुवाई में बने नए डिप्लोमैटिक फ्रेमवर्क को मानने से इनकार कर दिया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read

अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर भारत समेत जहां दुनिया के कई देशों ने खुशी जताई है। वहीं, इजरायल ने इस पर कड़ा रुख दिखाया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये शर्ते हमारे ऊपर लागू नहीं होगा और हम उसके किसी भी मांग के आगे नहीं झुकेंगे। नेतन्याहू के मंत्री ने दो टूक जवाब देते हुए कहा है कि 'ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता'।
इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि उनकी सेना सीमा पर अपनी जगहों से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने अमेरिका की अगुवाई में बने नए डिप्लोमैटिक फ्रेमवर्क को मानने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ किया कि बाहरी डिप्लोमैटिक दबाव से देश की मौजूदा सुरक्षा तैनाती में कोई बदलाव नहीं आएगा।
ईरान के रक्षा मंत्री की अमेरिका को दो टूक
इजराइल की सुरक्षा नीति के बारे में बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, "इजरायली नागरिकों की सुरक्षा के लिए लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में IDF इजरायली सेना अनिश्चित काल तक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौता लंबित है, तब तक इजरायल लेबनान में कब्जे वाली जमीन से पीछे नहीं हटेगा।"
ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता-इजरायली मंत्री
वहीं, इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर, इतामार बेन-ग्विर ने भी इस डील पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X पोस्ट में लिखा है, "ट्रंप का समझौता हमें बाध्य नहीं करता। इजरायल अमेरिका के अधीन नहीं है, और हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं। जब भी हमने इजरायल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके, हमें उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। "
Advertisement
इजरायल ने इन समझौते का किया जिक्र
बेन-ग्विर ने आगे लिखा- "ओस्लो समझौते के समय भी ऐसा ही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते में भी यही हुआ, और गाजा में नियंत्रण की हर कोशिश के दौरान भी यही हुआ, जिसका नतीजा हमारे लिए बहुत बुरा रहा। हम जोर देकर कह रह हैं कि हम अमेरिका से प्यार करते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप के आभारी हैं। फिर भी इजरायल कोई 'बनाना रिपब्लिक' (कमज़ोर या अस्थिर देश) नहीं है। मैं प्रधानमंत्री से हमेशा ये बातें कहता हूं, और हर अहम ऐतिहासिक मोड़ पर बंद कमरों में भी इन्हें दोहराता हूं।"
यहूदियों की रक्षा की जिम्मदारी को दोहराते हुए बेन-ग्विर ने आगे लिखा, "ऐतिहासिक पलों में, ऐतिहासिक फैसला लेना जरूरी होता है। हमें यह साफ कर देना चाहिए कि लेबनान से इजराइल की ओर ड्रोन, UAV या मिसाइल का हर हमला दाहीया में इजराइली हमले का कारण बनेगा। हमारा फर्ज इजरायल के नागरिकों, IDF के सैनिकों और यहूदी लोगों के प्रति है। साथ ही, हजारों सालों के निर्वासन के दौरान सताए गए और मारे गए यहूदियों के प्रति हमारा ऐतिहासिक फर्ज है कि हम इजरायल की धरती पर यहूदियों को सुरक्षा दें।"