अपडेटेड 3 March 2026 at 12:05 IST
सालों की प्लानिंग, ट्रैफिक कैमरे हैक, हर हरकत पर नजर... इजरायल के मोसाद ने खामेनेई के खात्मे का यूं तैयार किया था मास्टप्लान
Ali Khamenei: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को इजरायल-अमेरिका ने मिलकर मार डाला। बताया जा रहा है कि मोसाद ने ट्रैफिक कैमरे को हैक कर लिया था और कैसे उन्हें मारने को लेकर प्लान बनाया था।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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US-Israel-Iran War news: शनिवार, 28 फरवरी सुबह जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में अपने दफ्तर में शीर्ष अधिकारियों से जब मुलाकात कर रहे थे, तभी अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला कर दिया। हमला इतना सटीक था कि खामेनेई के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था ईरानी सेना के कई शीर्ष अधिकारी इस हमले में मारे गए। इतना ही नहीं खामेनेई के पूरे परिवार का नामों निशान मिट गया। वैसे तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे थे, लेकिन जिस सटीकता से खामेनेई पर हमला हुआ, वो सवाल जरूर खड़े करता है।
सवाल ये है कि अमेरिका और इजरायल ने आखिर इतना सटीक निशाना लगाया कैसे? इस हमले के लिए इतनी तगड़ी प्लानिंग कैसे की गई थी? अब लंदन बेस्ड फाइनेंशियल टाइम्स की एक न्यूज रिपोर्ट में इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।
तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को किया हैक
रिपोर्ट में इजरायल की जासूसी एजेंसियों द्वारा रचे गए इस प्लान का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने सालों पहले तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक कर लिया था। कई सूत्रों के हवाले से इस रिपोर्ट में बताया कि इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरान के सैन्य नेतृत्व की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरों में सेंध लगाई हुई थी। कैमरों से जो फुटेज मिल रही थी उनको एन्क्रिप्ट कर सर्वरों पर भेजा जाता था।
दरअसल, ईरान में लगे कैमरों को देश के सर्विलांस सिस्टम का हिस्सा माना जाता है। माना जा रहा है कि जिन कैमरों का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों की पहचान करने और उनको ट्रैक करने के लिए किया जा रहा था। मोसाद ने इनका इस्तेमाल उनके खिलाफ ही कर दिया।
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इतना ही नहीं मोबाइल फोन नेटवर्क तक भी पहुंच बनाई गई थी। इससे इजरायली और अमेरिकी बलों को खामेनेई की सटीक लोकेशन मिली और फिर लक्षित हमले को अंजाम दिया।
हर मूवमेंट पर रखी गई नजर
रिपोर्ट के मुताबिक कैमरे से गतिविधि पर नजर रखकर एक पूरा मूवमेंट पैटर्न तैयार हुआ। कौन कब निकला, कौन साथ था, कौन सा रूट लिया गया... यह सब रिकॉर्ड होता रहा। यह काम एक-दो महीने का नहीं, बल्कि ऑपरेशन काफी लंबा था।
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रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल को सालों पहले कैमरों का एक्सेस मिला। इस बीच एक खास कैमरा ऐसे एंगल पर लगा था, जो काफी अहम साबित हुआ। उससे पता चलता था कि खामेनेई की सिक्योरिटी टीम के सदस्य अपनी गाड़ियां कहां पार्क करते हैं। मोसाद ने इसकी मदद से गार्ड्स के पते, काम के शेड्यूल और उन्हें किसकी सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया था... इन सबकी जानकारियां जुटाई गई।
28 फरवरी को किया गया सटीक हमला
28 फरवरी 2026 को तेहरान स्थित खामेनेई के आवास और कंपाउंड (कार्यालय) को निशाना बनाकर हमले किए गए थे। इजरायल के अधिकारियों के मुताबिक, हमला ठीक उसी जगह पर हुआ जहां ईरान के सबसे बड़े नेता इकट्ठा हुए थे।
अमेरिका की प्लानिंग इतनी मजबूत थी की 30 सेकेंड में ईरान का एक बड़ा राजनैतिक कुनबा ध्वस्त कर दिया। 30 सेकेंड की बमबारी में ईरान अपना नेतृत्व खो बैठा। हमले की शुरुआत में ही तेहरान स्थित खामेनेई के कंपाउंड को निशाना बनाया गया। इस हमले में सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर कई बम गिराए गए, जिससे कंपाउंड पूरी तरह तबाह हो गया।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 3 March 2026 at 12:05 IST