अपडेटेड 3 March 2026 at 07:37 IST
तो क्या ईरान में उतरेगी अमेरिकी सेना? तेहरान में तबाही मचाने के बाद ट्रंप ने दिया बड़ा बयान, बोले- हम लंबे समय तक युद्ध के लिए भी तैयार
US-Iran war: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक युद्ध लड़ने के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि पहले हमने चार से पांच हफ्तों का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास इससे आगे तक अभियान चलाने की क्षमता है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Donald Trump warns Iran: ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर नरम पड़ते नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा। इतना ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने जरूरत पड़ने पर ईरान में अमेरिकी सैनिक उतारने की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो ईरान की धरती पर अमेरिकी सेना उतारने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है।
ट्रंप ने बताए हमले के चार मकसद
ट्रंप ने इस दौरान अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों का मकसद भी बताया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध के लिए हमारे चार उद्देश्य पूरी तरह से स्पष्ट हैं। पहला, ईरान की मिसाइल क्षमताओं को हम नष्ट कर रहे हैं। आप यह हर घंटे होते देख रहे हैं। उनकी नई और उन्नत मिसाइलें बनाने की क्षमता को भी नष्ट किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दूसरा, हम उनकी नौसेना को पूरी तरह खत्म कर रहे हैं। उनके 10 जहाजों को नष्ट किया जा चुका है। तीसरा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया का नंबर 1 आतंकवाद प्रायोजक देश कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। अंत में यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि ईरानी शासन अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार देना, उनतो फंडिंग करना और निर्देशित करना जारी न रख सके।
‘जरूरत पड़ी तो हमारी सेना…’
ट्रंप ने यह भी बताया कि यह युद्ध कब तक चल सकता है? उन्होंने कहा कि पहले से ही हम तय समय-सीमा से काफी आगे चल रहे हैं। जरूरत पड़ी तो हमारी सेना इससे ज्यादा समय तक कार्रवाई कर सकती है। ट्रंप ने साफ कहा कि चाहे कितना भी समय लगे, ठीक है। जितना समय लगेगा, हम उतना काम करेंगे। पहले हमने चार से पांच हफ्तों का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास इससे आगे तक अभियान चलाने की क्षमता है।
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‘हमला करने का यह आखिरी और सबसे अच्छा मौका’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 47 सालों से ईरानी शासन अमेरिका पर हमला कर रहा है और अमेरिकियों को मार रहा है। जनरल सोलेमानी को मैंने उसे अपने पहले कार्यकाल में ही समाप्त कर दिया था। अभी हमारे पास इस बीमार और कुटिल शासन द्वारा उत्पन्न असहनीय खतरों को खत्म करने और उन पर प्रहार करने का यही आखिरी और सबसे अच्छा मौका है।
उन्होंने इस बात पर जोर भी दिया कि ईरान को लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों को रखने की अनुमति देना मिडिल ईस्ट और अमेरिका दोनों के लिए "एक विनाशकारी खतरा" पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि हमें लगा कि समझौता हो गया है, लेकिन फिर वे (ईरान ) पीछे हट गए। फिर वे वापस आए और हमें लगा कि समझौता हो गया है, लेकिन वे फिर पीछे हट गए। आप इन लोगों के साथ समझौता नहीं कर सकते। आपको इसे सही तरीके से करना होगा।
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इस संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों में हवाई हमले किए, जिनमें सैन्य कमान केंद्रों, वायु रक्षा प्रणालियों, मिसाइल ठिकानों और प्रमुख शासनगत बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो गई। हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार शुरू किया। उसने इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 3 March 2026 at 07:17 IST