'जब खामेनेई की हत्या हुई, मैं उसी ऑफिस में था जहां बम गिरा...', ईरान के विदेश मंत्री का खुलासा; बोले- सुप्रीम लीडर जिद्द पर अड़ गए थे...
ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने गुरुवार को बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल संघर्ष की शुरुआत में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले में वे बाल-बाल बचे।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read

ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने गुरुवार को बताया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल संघर्ष की शुरुआत में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले में वे बाल-बाल बचे। उन्होंने बताया कि हमले का शिकार बनी इमारत के मलबे से बाहर निकलते समय उन्हें सर्वोच्च नेता की सुरक्षा की चिंता सता रही थी।
लेबनान के टेलीविजन को दिए एक खास इंटरव्यू में अरागची ने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती घंटों में जब अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस पर हमला हुआ, तो वे वहीं मौजूद थे। घटना का जिक्र करते हुए अरागची ने कहा, "जिस कार्यालय पर हमला हुआ, मैं उसी समय वहीं मौजूद था।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा पहला विचार और मेरी पहली चिंता नेता की हालत को लेकर थी।"
'सुप्रीम लीडर जिद्द पर अड़े'
विदेश मंत्री ने बताया कि हमले से हुई तबाही के बीच लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने दो दिन खामेनेई की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता में बिताए। उन्होंने याद किया कि सुरक्षित स्थान पर जाने की बार-बार सलाह दिए जाने के बावजूद, दिवंगत सर्वोच्च नेता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। अरागची ने खामेनेई के शब्दों को दोहराते हुए कहा, "मैं तब तक किसी शेल्टर या सुरक्षित स्थान पर नहीं जाऊंगा जब तक कि ईरानी जनता के हर सदस्य के पास भी सुरक्षित जगह न हो। मेरे लोगों के साथ जो कुछ भी होगा, वही मेरे साथ भी होगा।"
युद्ध के दौरान सर्वोच्च नेता के व्यवहार की तारीफ करते हुए अरागची ने कहा कि "सीधे खतरों" का सामना करने के बावजूद खामेनेई निर्देश जारी करते रहे और कामकाज की देखरेख करते रहे।
Advertisement
'अगर ईरान के पड़ोसी देशों में ये अमेरिकी ठिकाने न होते...'
ईरान के विदेश मंत्री ने संघर्ष के बढ़ने से पहले क्षेत्रीय देशों को तेहरान की चेतावनियों पर भी बात की। फारस की खाड़ी के देशों के दौरे के दौरान, उन्होंने स्पष्ट किया था कि ईरान के खिलाफ हमलों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों का कोई भी इस्तेमाल जवाबी कार्रवाई को न्योता देगा। अमेरिकी "सुरक्षा कवच" की आलोचना करते हुए अरागची ने कहा, "अगर ईरान के पड़ोसी देशों में ये अमेरिकी ठिकाने न होते, तो वे ईरान की जवाबी कार्रवाई का शिकार न बनते।"
अरागची के अनुसार, क्षेत्रीय सरकारों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी जमीन के इस्तेमाल का विरोध किया था, लेकिन वाशिंगटन ने "इसकी परवाह किए बिना कार्रवाई जारी रखी"। मंत्री ने तर्क दिया कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित उसके "विरोधियों" को चौंका दिया। उन्होंने कहा, "हमले के बड़े पैमाने के बावजूद, किसी को भी ईरान की तुरंत और जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी।"