युद्ध की आड़ में ईरान की क्रूरता, 23 साल के प्रदर्शनकारी युवक को दी फांसी, 8 दिनों में 10 लोगों को दी मौत की सजा
ईरान ने 6 अप्रैल 2026 को 23 वर्षीय प्रदर्शनकारी अली फहीम को फांसी दे दी। जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में बसिज मिलिशिया बेस पर हमले के आरोप में सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद सजा दी गई। युद्ध की आड़ में पिछले 8 दिनों में 10 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी जा चुकी है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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ईरान की सरकार ने सोमवार (6 अप्रैल 2026) को एक 23 साल युवक अली फहीम को फांसी दे दी। यह फांसी जनवरी 2026 के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान तेहरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की बसिज मिलिशिया बेस पर कथित हमले से जुड़े मामले में दी गई। ईरानी न्यायपालिका ने इसे शत्रु तत्वों द्वारा आतंकवादी दंगे का हिस्सा बताया और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद सजा को लागू किया।
यह फांसी दी गई जब देश इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध में व्यस्त है। सरकार इस युद्ध का फायदा उठाकर अपने विरोधियों को चुप कराने की कोशिश कर रही है। अली फहीम पर आरोप था कि उन्होंने बसिज बेस पर हमला किया, हथियारों की लूट की कोशिश की, जियोनिस्ट शासन (इजरायल) और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ काम किया।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फहीम समेत सात लोगों को फरवरी 2026 में मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें दो किशोर भी शामिल थे। अब तक इस मामले में चार लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी खतरे में हैं।
कौन था फांसी पाने वाला युवक?
23 साल के अली फहीम को तेहरान में फांसी दी गई। उसपर जनवरी 2026 में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान IRGC की बसीज मिलिशिया के एक ठिकाने पर हमला करने का आरोप था। अदालत ने कहा कि वह अमेरिका और इजरायल के लिए काम कर रहा था और एक सैन्य जगह से हथियार चुराने की कोशिश कर रहा था। यह मामला कई युवकों से जुड़ा है। फरवरी में सात लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसमें दो किशोर भी शामिल थे। अब तक चार लोगों को फांसी दी जा चुकी है।
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क्या चल रहा है ईरान में?
जनवरी 2026 में ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे। सरकार ने इन्हें बहुत हिंसक तरीके से दबाया। सैकड़ों लोग सड़कों पर मारे गए। अब सरकार उन लोगों को निशाना बना रही है जो प्रदर्शनों में शामिल थे या विपक्षी संगठनों से जुड़े हैं।
28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए फांसियां रुकी थीं, लेकिन अब फिर से तेज हो गई हैं। पिछले एक हफ्ते में ही 10 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी जा चुकी है। इनमें चार प्रदर्शनकारियों और छह अन्य विपक्षी सदस्य शामिल हैं। आरोप है कि सरकार युद्ध की आड़ में अपने विरोधियों को फांसी दे रही है।
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सैकड़ों लोगों को फांसी का खतरा
मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन युवकों को यातनाएं दी गईं, उनको वकील तक नहीं मिला और मुकदमा बहुत अनुचित तरीके से चला। अम्नेस्टी इंटरनेशनल और ईरान ह्यूमन राइट्स जैसे संगठन कहते हैं कि सरकार अपनी जनता पर ही युद्ध छेड़ रही है। उनका मकसद लोगों में डर पैदा करना और नए प्रदर्शन रोकना है। वे चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में और भी सैकड़ों लोगों को फांसी का खतरा है।