Indonesia Protest: भारत के बाद अब इंडोनेशिया में सड़कों पर उतरे छात्र, तख्तापलट की आहट के बीच भड़का Gen Z आंदोलन; जानें हिंसक प्रदर्शन की वजह
राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के प्रशासन की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर इंडोनेशिया में शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन ने अब हिंसक रूप ले लिया है। जानें Gen Z कि इस आंदोलन की वजह।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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भारत का पड़ोसी मूल्क इंडोनेशिया इन दिनों हिंसा की आग में जल रहा है। छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब हिंसक हो गया है। राजधानी जकार्ता में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए और सरकार विरोधी नारे लगाए। आक्रोशित छात्रों ने कई गाड़ियों को फूंक डाला। Gen Z के आंदोलन को देखते हुए भारी संख्या में पुलिसबल को सड़कों पर उतारना पड़ा। बढ़ते दवाब के बीच राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने आपतकालीन बैठक बुलाई।
राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के प्रशासन की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर 20 अक्टूबर को राजधानी जकार्ता सहित देश के कई प्रमुख शहरों में हजारों छात्र और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। योग्याकार्ता, बांडुंग, पेकानबारू और मकासर जैसे प्रमुख शहरों में छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए। राजधानी में, सैकड़ों विश्वविद्यालय के छात्र 'तुगु तानी' स्मारक (हीरोज मॉन्यूमेंट) पर इकट्ठा हुए। उन्होंने आर्थिक दबाव, पर्यावरण को हो रहे नुकसान, और सरकार की अक्षमता व भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
इंडोनेशिया में क्यों भड़का Gen Z आंदोलन?
इन विरोध प्रदर्शनों के दो मुख्य कारण हैं। बढ़ती महंगाई और पर्यावरण से जुड़ी गंभीर समस्याएं। आर्थिक मोर्चे पर, छात्र जीवन-यापन की बढ़ती लागत का विरोध कर रहे हैं, जो ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण और बढ़ गई है। उनकी मांग है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाया जाए।
जंगल की आग से कई शहर प्रभावित
बता दें कि पर्यावरण के मोर्चे पर, देश सुमात्रा, कालीमंतन और पापुआ में जंगलों और पीट-भूमि (peatland) में लगी भीषण आग से जूझ रहा है। इस आग की वजह से जहरीले धुएं के कारण उड़ानों में बाधा आई है, स्कूलों को बंद करना पड़ा है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 'जकार्ता पोस्ट' के अनुसार, 'अल नीनो' के कारण आए सूखे मौसम से और भड़की इस आग ने 2026 के पहले नौ महीनों में 1.9 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि को जला दिया है, जिससे लगभग 40 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं।
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सरकार से प्रदर्शनकारियों की ये है मांग
प्रदर्शनकारियों ने मांगों की एक सूची जारी की है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस लंबे समय से चल रही आग को 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित किया जाए, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। जकार्ता में एक प्रदर्शनकारी के हाथ में मौजूद बैनर पर लिखा था, "मुझे सांस लेने का अधिकार है। आग को तुरंत बुझाएं।"
तख्तालट की आहट के बीच एक्शन में सरकार
इन प्रदर्शनों और तख्तालट की आहट को देखते हुए, प्रशासन ने राजधानी में 9,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया। हालांकि विरोध प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि हंगामे के दौरान पुलिस के एक ट्रक में आग लगा दी गई, और कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पुतले भी जलाए।
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बता दें कि इंडोनेशिया में पिछला बड़ा विरोध प्रदर्शन अगस्त में हुआ था, जिसमें सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया था। इससे पहले, 2025 में भी एक मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर की पुलिस द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन हुए थे। पिछले साल हुई झड़पों में भी कई लोगों की जान चली गई थी।