US-Iran War: 'भारत ही करा सकता है अमेरिका और ईरान के बीच समझौता', फिनलैंड के राष्ट्रपति ने की अपील; कहा- हमने एस जयशंकर को...
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने आधिकारिक तौर पर भारत से तनाव कम करने में कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने आधिकारिक तौर पर भारत से तनाव कम करने में कूटनीतिक भूमिका निभाने का आग्रह किया है। उन्होंने नई दिल्ली से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने की मध्यस्थता करने की अपील की है।
स्टब ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की अनोखी स्थिति उसे शांति वार्ता में मदद करने का अवसर देती है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया कूटनीतिक पहलों का हवाला दिया, जिन्होंने लगातार तनाव कम करने की अपील की है।
क्या बोले स्टब?
स्टब ने कहा, "हमें युद्धविराम की जरूरत है। मैं सोच रहा हूं कि क्या भारत वास्तव में इसमें शामिल हो सकता है। हमने देखा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने हालात शांत करने के लिए युद्धविराम की अपील की थी।" राष्ट्रपति की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत इस संकट से निपटने के लिए तेहरान के साथ अपने संपर्क को काफी बढ़ा रहा है।
पिछले एक हफ्ते में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के साथ फोन पर चार बार बातचीत की है। इन चर्चाओं का मुख्य विषय पूरे क्षेत्र में बदलती सुरक्षा स्थिति और हालात को स्थिर करने की तत्काल आवश्यकता थी।
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नई दिल्ली को दी गई अपनी जानकारी में, अराघची ने मौजूदा शत्रुता के लिए अमेरिका और इजराइल की "आक्रामकता" को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है और वह उसका इस्तेमाल करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संकट के क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
तेहरान का रुख
भारत के मध्यस्थता प्रयासों के बावजूद, शांति का मार्ग अभी भी जटिल बना हुआ है। तेहरान ने उन दावों को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि वह केवल एक साधारण युद्धविराम चाहता है। तेहरान का कहना है कि युद्ध पूरी तरह से समाप्त होना चाहिए, न कि केवल कुछ समय के लिए शत्रुता रोक दी जाए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी व्यक्तिगत रूप से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत की है। अपनी बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने बढ़ती हिंसा और आम नागरिकों की जान जाने की दुखद घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और माल और ऊर्जा की आवाजाही भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।