पाकिस्तान में अमेरिकी-ईरानी डेलिगेशन शांति वार्ता में सुरक्षा का खतरा, जेडी वेंस की सेफ्टी को लेकर गंभीर चिंता

US-Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शनिवार को महत्वपूर्ण शांति वार्ता होने जा रही है, जिसमें उपराष्ट्रपति JD वेंस शामिल होंगे। लेकिन पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर अमेरिका में गहरी चिंता है। पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी एरी फ्लेशर ने इसे खतरनाक बताया। आतंकवाद के इतिहास वाले पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है।

Security threat to US-Iranian delegation peace talks in Pakistan serious concerns about JD Vance safety
पाकिस्तान में अमेरिकी-ईरानी डेलिगेशन शांति वार्ता में सुरक्षा का खतरा | Image: AP

US-Iran Talks Islamabad : अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए शनिवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय वार्ता होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत उच्च अधिकारी शामिल होने वाले हैं। लेकिन इस मिशन को लेकर सुरक्षा की चिंता अमेरिका में काफी बढ़ गई है।

इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। हालांकि, व्हाइट हाउस के पूर्व प्रेस सचिव एरी फ्लेशर ने इस दौरे को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर चेतावनी जारी की है। एरी ने साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान में अमेरिकी वार्ताकारों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने पाकिस्तान को हथियारों से लैस खतरनाक देश बताया, जहां सरकार का पूर्ण नियंत्रण नहीं है। एरी ने कहा, "वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें।"

उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा के दौरान डेकॉय एयरक्राफ्ट (चकमा देने वाले विमान) का इस्तेमाल करना पड़ा था। इसी तरह, राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (George W. Bush) की यात्रा के समय सीक्रेट सर्विस ने विरोध जताया था। फ्लेशर के अनुसार, यह मिशन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा।

पाकिस्तान में आतंकवाद का इतिहास

2025 में पाकिस्तान ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में शीर्ष पर रहा, जहां आतंकवाद से जुड़ी 1139 मौतें दर्ज हुईं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे संगठन अभी भी सक्रिय हैं। पाकिस्तान में अमेरिकी-ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि देश में आतंकवाद का लंबा इतिहास रहा है।

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  • 2009 श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमला: लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के पास बस पर गोलीबारी में कई पुलिसकर्मी और नागरिक मारे गए, इसमें कई खिलाड़ी घायल हुए। इसके बाद पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सालों तक प्रभावित रहा।
  • सेना पर हमले: रावलपिंडी और लाहौर समेत कई जगहों पर आर्मी ठिकानों पर बड़े हमले हुए, जिसमें सैकड़ों सैनिक शहीद हुए।
  • पेशावर स्कूल हमला: 2014 में आर्मी पब्लिक स्कूल में हमला हुआ। इस हमले में 149 लोगों की मौत हुई, इसमें ज्यादातर बच्चे थे।
  • डिप्लोमेट्स पर हमले: अमेरिकी और अन्य विदेशी डिप्लोमेट्स पर कई बार हमले और हत्याएं हुईं।

पाकिस्तान खुद को 'पीस मेकर' बताते हुए इस वार्ता की मेजबानी कर रहा है, लेकिन सुरक्षा की पुरानी कमजोरियां और क्षेत्रीय तनाव खासकर लेबनान इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। अगर यह वार्ता सफल होती है तो पश्चिम एशिया में शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन सुरक्षा चूक किसी भी बड़े परिणाम का कारण बन सकती है।

पाकिस्तान की तैयारियां

पाकिस्तान ने वार्ता को सफल बनाने के लिए इस्लामाबाद को छावनी में बदल दिया है। राजधानी में सख्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है, सड़कें खाली कर दी गई हैं और दो दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। सेना और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। पाकिस्तान इस वार्ता को अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में देख रहा है।

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Published By :
Sagar Singh
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