बाबरी मस्जिद चौक का नाम अब जैन मंदिर चौक, लाहौर का इस्लामपुरा बना कृष्णनगर; पाकिस्तान में क्यों बदले जा रहे सड़कों के मुस्लिम नाम?

भारत की सरहद से महज 50 किलोमीटर दूर स्थित लाहौर में सरकार ने आजादी से पहले के कई पुराने नामों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें हिंदू, सिख और ब्रिटिश कालीन नाम शामिल हैं।

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पाकिस्तान में क्यों बदले जा रहे सड़कों के मुस्लिम नाम? | Image: X/AP

भारत का पड़ोसी मूल्क पाकिस्तान यूं तो अपनी इस्लामी कट्टरता के लिए जाना जाता है, लेकिन हालिया घटनाक्रम से देश की छवि को कुछ हद तक बदलती नजर आ रही है। पाकिस्तानी पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने ऐसे फैसले लिए हैं, जो पाकिस्तान में विरले ही देखने को मिलते हैं। अब इन फैसलों की चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है।

भारत की सरहद से महज 50 किलोमीटर दूर स्थित लाहौर में सरकार ने आजादी से पहले के कई पुराने नामों को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें हिंदू, सिख और ब्रिटिश कालीन नाम शामिल हैं। सरकार ने लाहौर की कई सड़कों, गलियों और चौकों के विभाजन-पूर्व नामों को फिर से बहाल करने की योजना को मंजूरी दे दी है। इसके बाद नाम बदलने का काम भी शुरू हो गया है।

लाहौर की सड़कों से हटाए जा रहे हैं मुस्लिम नाम

पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी लाहौर में, सरकारी साइनबोर्ड अब उस परंपरा को दर्शा रहे हैं जिसे वहां के निवासियों ने लंबे समय से चुपचाप संजोकर रखा था। विभाजन के 79 साल बाद, लाहौर के अधिकारियों ने इस्लामी नामों वाले साइनबोर्डों को हटाकर पुराने हिंदू, सिख और औपनिवेशिक नामों वाले साइनबोर्ड लगाना शुरू कर दिया है।

बाबरी मस्जिद चौक बना जैन मंदिर चौक

सरकार के फैसले के बाद इस्लम्पुरा का नाम बदलकर कृष्ण नगर कर दिया गया है, बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर जैन मंदिर चौक कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक पिछले दो महीनों में नौ स्थानों के नाम बदले गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य शहर की विभाजन-पूर्व सांस्कृतिक विरासत और पहचान को पुनर्जीवित करना है।

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इन जगहों के बदले गए नाम

सुन्नतनगर का नाम बदलकर संत नगर कर दिया गया है, मौलाना जफर अली खान चौक अब लक्ष्मी चौक है, मुस्तफाबाद अब आधिकारिक तौर पर धरमपुरा है, सर आगा खान चौक का नाम बदलकर डेविस रोड कर दिया गया है, अल्लामा इकबाल रोड को फिर से जेल रोड कहा जा रहा है, फातिमा जिन्ना रोड एक बार फिर क्वींस रोड बन गई है और बाग-ए-जिन्ना लॉरेंस गार्डन के रूप में अपने औपनिवेशिक संबंध को पुनः प्राप्त कर रहा है ।

क्यों बदले जा रहे सड़कों के मुस्लिम नाम?

नाम बदलने का यह अभियान लाहौर अथॉरिटी फॉर हेरिटेज रिवाइवल (एलएएचआर) नामक एक व्यापक शहरी संरक्षण अभियान का हिस्सा है। यह लगभग 50 अरब पीकेआर की महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य दशकों की उपेक्षा, अव्यवस्थित शहरीकरण और वैचारिक पुनर्लेखन के बाद शहर की स्थापत्य और सांस्कृतिक संरचना को पुनर्स्थापित करना है। इसकी शुरुआत पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने 2025 में की थी।

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Published By:
 Rupam Kumari
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