आतंक को बढ़ावा देने वाला करेगा शांति की बात, गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री! पीएम शहबाज बोले- ट्रंप ने खुद दिया है न्योता
अमेरिका ने गाजा में शांति के लिए बनाए गए बोर्ड में पाकिस्तान को शामिल होने का न्योता दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने यह कूटनीतिक चुनौती है, क्योंकि इसमें सैन्य योगदान की संभावना और घरेलू विरोध की आशंका है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Gaza Peace Board: गाजा में जारी हिंसा और मानवीय संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को गाजा के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस न्योते की पुष्टि की है और कहा है कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।
पाकिस्तान ने किया फिलिस्तीन मुद्दे का समर्थन
पाकिस्तान ने हमेशा फिलिस्तीन मुद्दे का समर्थन किया है और दो-राष्ट्र समाधान की वकालत की है। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप फिलिस्तीन के स्थायी और न्यायसंगत समाधान के लिए सभी पहलों का समर्थन करता रहेगा। गाजा में लंबे समय से जारी हिंसा को समाप्त करने के लिए अमेरिका समेत कई वैश्विक ताकतें कूटनीतिक स्तर पर संयुक्त पहल कर रही हैं। बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य गाजा में स्थायी शांति, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य के राजनीतिक समाधान के लिए वैश्विक नेताओं को एक मंच पर लाना है।
यह न्योता पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक फंदा
हालांकि, पाकिस्तान के लिए यह न्योता एक कूटनीतिक फंदा भी हो सकता है। अमेरिकी रणनीति के तहत मुस्लिम देशों की सेनाओं को गाजा में शांति स्थापना के लिए भेजने की योजना है। अगर पाकिस्तान इस बोर्ड का हिस्सा बनता है, तो उसे अपनी सेना गाजा भेजनी पड़ सकती है, जिससे हमास जैसे संगठनों से टकराव हो सकता है। यह पाकिस्तान की जनता के लिए स्वीकार करना मुश्किल होगा, क्योंकि यहां इजरायल विरोधी भावनाएं प्रबल हैं। इससे पाकिस्तान में आंतरिक अशांति भी पैदा हो सकती है।
ट्रंप का न्योता ठुकराना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं
दूसरी ओर, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति कमजोर है और उसे IMF और अमेरिका की मदद की जरूरत है। ऐसे में ट्रंप के न्योते को ठुकराना भी पाकिस्तान के लिए आसान नहीं है, क्योंकि इससे अमेरिका नाराज हो सकता है और आर्थिक सहायता पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान के सामने यह दुविधा है कि वह इस बोर्ड में शामिल होकर अपनी कूटनीतिक भूमिका बढ़ाए या इससे दूर रहकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचे।
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बोर्ड में ट्रंप खुद चेयरमैन
इस बोर्ड में ट्रंप खुद चेयरमैन हैं और इसमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल-थवादी भी शामिल हैं। इजरायल ने इस बोर्ड पर आपत्ति जताई है, क्योंकि इसमें तुर्की और कतर जैसे देश शामिल हैं जिन्हें वह हमास का समर्थक मानता है। फिलिस्तीनी संगठन इस्लामिक जिहाद ने भी इसे इजरायल के हितों की पूर्ति करने वाला बोर्ड बताया है।
पाकिस्तान के लिए यह स्थिति जटिल है। शहबाज शरीफ सरकार को यह तय करना होगा कि वह इस अंतरराष्ट्रीय पहल में कितना और कैसे योगदान देगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि पाकिस्तान इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में क्या रुख अपनाता है और गाजा संकट के समाधान में उसकी भूमिका क्या होगी।