Nepal: केपी ओली के तख्तापलट में नेपाल को चुकानी पड़ी भारी कीमत, विद्रोह और हिंसा के दौरान अबतक 51 लोगों ने गंवाई जान, 30 को लगी गोली
Nepal Violence: इस हिंसक प्रदर्शन में जान गंवाने वालों को लेकर नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी किया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बताया है कि इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक मरने वालों की संख्या 51 हो चुकी है। इनमें से 30 लोगों की जान गोली लगने से गई है।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read

Nepal Violence: नेपाल में जेन जी (युवाओं) के द्वारा सोमवार से जारी प्रदर्शन का आज पांचवां दिन है। मिली जानकारी के अनुसार, इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रदर्शन के पांचवें दिन 17 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कल गुरुवार तक नेपाल हिंसा में कुल 34 लोग मारे गए थे।
वहीं, हिंसा को कम करने के लिए नेपाल में सेना अपना काम कर रही है। राजधानी काठमांडू समेत देश के कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया था और अभी इनमें से कई शहरों में कर्फ्यू लगा हुआ है। इस बीच नेपाल में केपी ओली सरकार के तख्तापलट के बाद अंतरिम पीएम को लेकर पूर्व जज सुशीला कार्की का नाम काफी आगे बताया जा रहा है।
गोली लगने से गई 30 लोगों की जान - स्वास्थ्य मंत्रालय
नेपाल में हिंसक प्रदर्शन ने पूरी दुनिया की नजरों को अपनी ओर खींच लिया है। इस हिंसक प्रदर्शन के बीच केपी शर्मा ओली को अपने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और उनकी सरकार चली गई थी। इनके अलावा कई मंत्रियों ने भी इस्तीफा दिया था। वहीं, इस हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, प्रधानमंत्री आवास, राष्ट्रपति भवन, कई मंत्रियों के घर और होटल्स में आग लगा दी थी।
इस हिंसक प्रदर्शन में जान गंवाने वालों को लेकर नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी किया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बताया है कि इस हिंसक प्रदर्शन में अब तक मरने वालों की संख्या 51 हो चुकी है। इनमें से 30 लोगों की जान गोली लगने से गई है। वहीं, बाकी के 21 लोगों की मौत चोट लगने, हिंसा में जलने और मार-पीट के बीच घाव लगने से हुई है। बताया गया कि इन मरने वालों में तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। एक भारतीय महिला की भी मौत की खबर है।
Advertisement
ओली ने इस्तीफे के बाद क्या कहा?
बीते दिनों अपदस्थ प्रधानमंत्री और CPN-UML अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने शिवपुरी से एक लिखित मैसेज के माध्यम से जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में शामिल युवाओं को संबोधित किया। ओली के मैसेज में उनके व्यक्तिगत दुःख, संघर्ष और शासन पर उनके विचार व्यक्त किए गए।
ओली ने 1994 में गृह मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए इस बात पर जोर दिया कि उनके प्रशासन में कोई गोली नहीं चलाई गई, और शांति के प्रति अपने आजीवन रुख पर जोर दिया।
हालांकि, उन्होंने चल रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे की ताकतों पर युवा प्रदर्शनकारियों का शोषण करके विनाशकारी गतिविधियां कराने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, "महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ अचानक नहीं हुई। आपके मासूम चेहरों का इस्तेमाल गुमराह करने वाली राजनीति के लिए करने की कोशिश की जा रही है।"