जंग के बीच ईरान का 'मिशन तबाही'! सेट कर दिए ये 4 टारगेट, अगर IRGC का प्‍लान हुआ कामयाब तो बर्बाद हो जाएंगे अमेरिका और इजरायल

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसके हमलों से अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा।

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जंग के बीच ईरान का 'मिशन तबाही'! सेट कर दिए ये 4 टारगेट, अगर IRGC का प्‍लान हुआ कामयाब तो बर्बाद हो जाएंगे अमेरिका और इजरायल | Image: Republic

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में पिछले 100 घंटों से एक रहस्यमयी शांति का माहौल बना हुआ है। इजरायल के हमलों और ईरान के जवाबी कार्रवाई के बाद अमेरिका चार दिनों से चुप्पी साधे हुए है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप का अगला प्लान किसी को नहीं पता। 28 फरवरी 2026 को इजरायली हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या हो गई, जिसके बाद संघर्ष भड़क उठा।

ईरान ने जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका व उसके सहयोगियों के लिए बंद कर दिया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसके हमलों से अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा। ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी दी, लेकिन अब तक अमेरिकी बॉम्बर, मिसाइलें और युद्धपोत निष्क्रिय हैं। उन्होंने पावर प्लांट्स पर स्ट्राइक्स को कई बार टाल दिया, बताते हुए कि ईरान के साथ "उत्पादक बातचीत" चल रही है। अमेरिकी इंटरसेप्टर जहाज ईरान के हमलों को रोकने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई आक्रामक कदम नहीं।

ईरान की 'एनर्जी वॉर' रणनीति

IRGC ने एक साथ चार लक्ष्यों पर निशाना साधा है, संघर्ष को ऊर्जा युद्ध में बदलते हुए। पहला लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट, जो वैश्विक तेल का 20% रास्ता है और अब अमेरिकी जहाजों के लिए बंद है। दूसरा इजरायल के पावर प्लांट्स और न्यूक्लियर साइट्स पर हमले। तीसरा खाड़ी देशों (सऊदी, यूएई, कतर) के तेल-गैस ठिकाने। चौथा अमेरिकी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स और सैन्य बेस।

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ट्रंप की दुविधा

ट्रंप ने दो बार अंतिम हमले की चेतावनी दी, लेकिन ईरान 'एनर्जी डिटरेंस' से पीछे नहीं हटा। ईरान ने साफ कहा कि उसके ऊर्जा स्रोतों पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र के तेल कुओं को तबाह कर देगा। युद्ध के 29वें दिन तक होर्मुज बंद है, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं। IRGC की यह रणनीति सफल रही तो अमेरिका-इजरायल को आर्थिक व सैन्य झटका लग सकता है।

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क्या बातचीत से टलेगा महाविनाश?

फिलहाल राहत की बात यह है कि ईरान ने अपनी इस खौफनाक योजना को पूरी तरह अमल में नहीं लाया है। पर्दे के पीछे अभी भी कूटनीतिक बातचीत के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जिस तरह से दोनों पक्ष एक-दूसरे के इंफ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की धमकी दे रहे हैं, उससे साफ है कि हालात किसी भी पल बेकाबू हो सकते हैं। यह चार-स्तरीय रणनीति इस बात का सबूत है कि अब यह जंग सिर्फ सरहदों की नहीं, बल्कि आम इंसान की रसोई, उसकी कार और उसके घर की बिजली तक पहुंच चुकी है। अगर यह प्लान हकीकत बना, तो इसकी लपटें मिडिल ईस्ट से निकलकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेंगी।

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Published By :
Ankur Shrivastava
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