Iran-US-Israel War: 40 दिनों की लड़ाई में खुल गई अमेरिका के 'ताकत' की पोल, अब मौके पर चौका मारने की फिराक में चीन, कर सकता है इस देश पर हमला!
8 अप्रैल की सुबह 2 चीनी विमान मीडियन लाइन पार कर ताइवान एयरस्पेस में दाखिल हो गए। साथ ही, नौसेना के 9 जहाजों और एक सरकारी पोत का बेड़ा नजर आया।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
- 3 min read

अमेरिका और ईरान दो हफ्ते युद्ध रोकने के लिए सहमत हो गए हैं. इस युद्ध विराम पर इजरायल भी सहमत है. युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा है कि 10 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि इस्लामाबाद में मिलेंगे। युद्ध विराम से दुनिया ने शांति की सांस तो ली मगर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नई आशंकाएं जन्म ले रही हैं। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान की सीमा में घुसपैठ की, जिसकी पुष्टि ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने मैप के साथ की है।
8 अप्रैल की सुबह 2 चीनी विमान मीडियन लाइन पार कर ताइवान एयरस्पेस में दाखिल हो गए। साथ ही, नौसेना के 9 जहाजों और एक सरकारी पोत का बेड़ा नजर आया। इसके बाद से ताइवान की सेना हाई अलर्ट पर है। ताइवान के विशेषज्ञ ईरान संघर्ष को भौगोलिक रूप से दूर की घटना नहीं मान रहे। उन्हें लगता है कि अमेरिका के सीमित संसाधनों ने उसकी 'डिटरेंस' क्षमता को कमजोर किया है।
पश्चिम एशिया में ड्रोन हमलों से बचाव के लिए अमेरिका को दक्षिण कोरिया से THAAD इंटरसेप्टर मिसाइलें मंगानी पड़ीं, जिससे उसके स्टॉक का खुलासा हुआ। ट्रंप प्रशासन पर युद्ध अपराध के आरोप लगे, उनकी लोकप्रियता गिरी और घरेलू दबाव बढ़ा। ऊर्जा संकट ने महंगाई को हवा दी, जो अमेरिका की प्राथमिकताओं पर असर डाल रहा है।
क्या अमेरिका ताइवान की ढाल बनेगा?
Advertisement
सवाल उठ रहा है कि अगर चीन ताइवान पर हमला बोलता है, तो क्या अमेरिका, जो ईरान जैसे संघर्ष से जूझ चुका है, पूर्ण हस्तक्षेप करेगा? ताइवान यूनिवर्सिटी की डॉ. बोन्नी यूशी लिया का मानना है कि अमेरिका ने NATO सहयोगियों को भी ईरान हमले की पूर्व सूचना नहीं दी। जापान-दक्षिण कोरिया जैसे मित्रों को भी अनिश्चितता सता रही है। चीन 'ग्रे-जोन' रणनीति अपना सकता है। साइबर अटैक, नाकाबंदी या सीमित कार्रवाई से दबाव बनाना। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी रुकावट ताइवान स्ट्रेट में भी संभव है, जो वैश्विक व्यापार को ठप कर देगी।
ताइवान की रणनीति: एकजुटता और जवाबी ताकत
Advertisement
एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि चीन अमेरिका के संसाधन ह्रास को मौका समझकर ताइवान पर दबाव बढ़ा सकता है, बिना युद्ध के। ताइवान को अपनी रक्षा मजबूत करनी होगी—लोगों को एकजुट रखना, स्पष्ट संदेश देना कि हर दबाव का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। ईरान ने दिखाया कि मजबूत नैरेटिव कितना कारगर होता है। फिलहाल, ताइवान सतर्कता बरत रहा है, लेकिन युद्ध की आहट साफ सुनाई दे रही है।
चौतरफा लड़ाई में फंसा अमेरिका
व्यापार युद्ध, वेनेजुएला, ईरान - ट्रंप ने अपने देश को एक साथ कई मोर्चों पर उलझा दिया है। यह रणनीतिक गलती नहीं, अयोग्यता और असफलता है। ट्रंप ने चुनाव के समय अपने भाषणों में कहा था कि उनका शपथ ग्रहण ही ‘लिबरेशन डे’ होगा यानी इस दिन के बाद अमेरिका गलत नीतियों से मुक्त हो जाएगा, लेकिन हुआ उल्टा। आज उनको ब्रिटेन, कनाडा या जर्मनी से सहयोग मिल सकता था, लेकिन इन सभी से वह टैरिफ पर लड़ चुके हैं। कभी-कभी ऐसा लगता है कि ट्रंप को यह जानने में कोई दिलचस्पी नहीं कि कमजोर, व्यस्त और बिखरी हुई अमेरिकी सेना भविष्य में चीन के लिए अवसर पैदा कर सकती है।
इसे भी पढ़ें- 7 घंटे, 21 एयरक्राफ्ट, और दुश्मन की ताबड़तोड़ फायरिंग...ट्रंप ने बताया अमेरिकी सेना ने दिन के उजाले में दोनों पायलटों को कैसे किया रेस्क्यू