घर से कम निकलें, वर्क फ्रॉम होम करें... COVID-19 के बाद आने वाला है सबसे बड़ा 'LOCKDOWN'? पूरी दुनिया को IEA की चेतावनी
बेवजह यात्रा कम करें, केवल जरूरी काम के लिए बाहर निकलें और अगर संभव हो तो घर से काम करें...यह ठीक वही भाषा है जो कोरोना (COVID) में लॉकडाउन से ठीक पहले इस्तेमाल हुई थीं।
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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Iran-Israel War: बेवजह यात्रा कम करें, केवल जरूरी काम के लिए बाहर निकलें और अगर संभव हो तो घर से काम करें...यह ठीक वही भाषा है जो कोरोना (COVID) में लॉकडाउन से ठीक पहले इस्तेमाल हुई थीं। मौजूदा समय में सरकारें फिर इन्हीं बातों को दोहरा रही हैं। उस समय कारण महामारी था लेकिन इस समय वैश्विक ऊर्जा संकट है। जी हां मिडिल ईस्ट में जारी तनाव (ईरान-इजरायल युद्ध) और Strait of Hormuz में रुकावट के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
अगर हालात ऐसे ही रहे तो ये कहना गलत नहीं होगा कि कोविड के बाद एक फिर सबसे बड़ा लॉकडाउन आने वाला है। आपको बता दें कि युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आना-जाना रुक गया है। ये वही रास्ता है जहां से दुनिया का सबसे ज्यादा तेल जहाजों पर लदकर गुजरता है। रास्ता रुक जाने के कारण तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। वहीं अमेरिका में गैस की कीमत प्रति गैलन 5 डॉलर हो गई है। तेल महंगा होने के चलते ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ा है और चीजें महंगी हो गई हैं।
खाना भी होगा महंगा
दुकानों में अब हर चीज महंगी होती जा रही है। खाने के सामान पर भी अब महंगाई के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि खाद्य सुरक्षा भी खतरे में है। खाद्य पदार्थ बनाने के लिए जरूरी खाद भी होर्मुज से आता है। किसान ज्यादा पैसे देंगे तो खाना भी महंगा होगा।
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उड़ानें कम कर रही हैं दूसरे देशों की एयरलाइंस
तेल महंगा होने का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। कई देशों में ईंधन की कमी के चलते राशनिंग शुरू हो गई है, हवाई उड़ानों में कटौती हो रही है और यात्रा महंगी होती जा रही है। यूनाइटेड एयरलाइंस ने इस हफ्ते ही 5% उड़ानें काट दी हैं। दूसरे देशों की एयरलाइंस भी उड़ानें कम कर रही हैं। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब कुछ महंगा हो रहा है।
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इसी बीच International Energy Agency (IEA) ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एक 10-पॉइंट प्लान जारी किया है। इसमें कम यात्रा करने, घर से काम करने, वाहनों के इस्तेमाल को सीमित करने जैसे सुझाव शामिल हैं। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कदम भले ही ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ के नाम पर उठाए जाएं, लेकिन इनका असर कहीं न कहीं कोविड लॉकडाउन जैसा महसूस हो सकता है।
क्या कहना है IEA का?
IEA कह रही है कि कोविड में यह काम आया था, वैसे ही अब एनर्जी क्राइसिस में काम आएगा। IEA का प्लान कई देशों में लागू होने वाला है। यह स्थायी व्यवस्था बन सकती है।