अपडेटेड 15 January 2026 at 00:01 IST

ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद पर अड़े डोनाल्ड ट्रंप तो यूरोप के इस देश ने खींची तलवार, Greenland के पीछे क्यों पड़ा है अमेरिका?

Donald Trump Vs Greenland: ट्रंप ने बुधवार को फिर से ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल का जिक्र किया। उन्होंने कहा ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं। उधर डेनमार्क के बाद अब फ्रांस ने भी अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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Greenland के पीछे क्यों पड़ा है अमेरिका? | Image: Social media

Donald Trump Vs Greenland: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेताबी लगातार बढ़ती जा रही है। एक तरफ ईरान को धमकी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रीनलैंड को हासिल करने के उनके ऐलान ने विश्व राजनीति में नया हलचल मचा दिया है। 
बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से इस बात पर जोर देते हुए कहा कि 'ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कंट्रोल से कम उन्हें कुछ मंजूर नहीं। ट्रंप ने जैसे ही ग्रीनलैंड को हासिल करने की बात की वैसे ही अब यूरोपीय देश इसके खिलाफ मुखर होने लगे हैं। कई देशों ने इसका कड़ा विरोध किया है। डेनमार्क के बाद अब फ्रांस बीच-बचाव में खुद गया है। फ्रांस ने साफ चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ करना खतरनाक साबित हो सकता है।

ग्रीनलैंड से कम कुछ मंजूर नहीं-डोनाल्ड ट्रंप

आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के लिए कांग्रेस में विधेयक पेश हुआ था। विधेयक पेशी के अगले ही दिन ट्रंप ने कहा कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड देश के लिए बहुत जरूरी है। इसमें नाटो को भी पहल करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं करते हैं, तो रूस या चीन इसे हथिया लेंगे। ट्रंप ने आगे कहा 'ग्रीनलैंड के आने से नाटो अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बन जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि ग्रीनलैंड को लेने के लिए ताकत का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ करना खतरनाक-फ्रांस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ग्रीनलैंड का कब्जा करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके खिलाफ यूरोप के कई देश मुखर हो गए हैं। खासकर, फ़्रांस इसके खिलाफ सबसे अधिक खुलकर आया है। बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सख्त शब्दों में कहा 'अगर किसी यूरोपीय और सहयोगी देश की संप्रभुता प्रभावित होती है, तो इसका परिणाम खतरनाक हो सकता है। मैक्रों ग्रीनलैंड के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

ट्रेड डील रद्द करने का EU कर रहा है विचार

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों के विरोध में यूरोपीय संसद के सदस्य अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर जिद्द नहीं छोड़ता है, तो सांसदों का एक समूह चाहता अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने के कानून पर रोक लगा दी जाए। हालांकि, यह भी दावा है कि अगर यूरोपीय संसद अमेरिका के खिलाफ जाते हैं, तो ट्रंप यूरोपीय उत्पादों पर और ज्यादा टैरिफ लगा सकते हैं।

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ग्रीनलैंड के पीछे क्यों पड़ा है अमेरिका?

अब सवाल है कि ग्रीनलैंड के पीछे अमेरिका क्यों पड़ा है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर कई बार जिक्र कर चुके हैं कि अगर अमेरिका इसे कब्जे में नहीं लेता है, तो रूस या चीन ले लेंगे। ट्रंप ने कई बार जिक्र किया है कि ग्रीनलैंड में हर तरफ रूसी और चीनी जहाज भरे पड़े हैं। अमेरिका का दावा है कि ग्रीनलैंड नेशनल सिक्योरिटी के लिए बेहद जरूरी है। ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन से संभावित खतरों से निपटने के लिए यह द्वीप एक महत्वपूर्ण सुरक्षा बफर (Strategic Buffer) के रूप में कार्य कर सकता है।

दुर्लभ खनिज और संसाधन का भंडार है ग्रीनलैंड

ग्रीनलैंड में बहुत बड़े भंडार हैं। रिपोर्ट के अनुसार ग्रीनलैंड यूरेनियम, लिथियम और कोबाल्ट, ग्रेफाइट जैसे कई दुर्लभ खनिज पदार्थों से भरा हुआ, जिसके अमेरिका अपने कब्जे में लेना चाहता है। ये खनिज रक्षा तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसी भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक माना जाता है।

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Published By : Sahitya Maurya

पब्लिश्ड 14 January 2026 at 23:53 IST