'जल प्रलय' से जूझ रहे नेपाल में फिर कांपी धरती, भूकंप के झटके से दहशत में आए लोग, जानिए कितनी रही तीव्रता
'जल प्रलय' से जूझ रहे नेपाल में फिर कांपी धरती, भूकंप के झटके से दहशत में आए लोग, जानिए कितनी रही तीव्रता
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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नेपाल की राजधानी काठमांडू में मंगलवार को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.0 मापी गई। भूकंप ऐसे समय आया है, जब नेपाल पहले से ही हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान में जुटा हुआ है। भूकंप के झटकों के बाद लोगों में कुछ समय के लिए डर का माहौल बना।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भूकंप का असर काठमांडू और आसपास के इलाकों में महसूस किया गया। फिलहाल इस भूकंप से बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है।
रात 9 बजकर 38 मिनट पर आया भूकंप
रात के 9 बजकर 38 मिनट का वक्त था, जब अचानक नेपाल के कई इलाकों में लोगों को झटके महसूस हुए। अचानक घरों के पंखे, खिड़कियां और दरवाजों के हिलने की आवाज आने लगी। जो लोग टीवी देख रहे थे या खाना खाकर सोने की तैयारी में थे, वो तुरंत अपने घरों से बाहर की तरफ भागे।
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अचानक आए इस झटके से कुछ ही देर में सड़कों और खुले मैदानों में लोगों की भीड़ लग गई। रात के सन्नाटे में इस भूकंप ने लोगों के मन में फिर से हाल ही में गुजरे खौफनाक मंजर की यादें ताजा कर दीं। हर कोई एक-दूसरे का हाल-चाल पूछने में जुट गया।
143 किलोमीटर गहराई में आए झटके
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भूकंप के मामले में उसकी गहराई सबसे बड़ा फैक्टर होती है। जब भी भूकंप जमीन के बहुत अंदर यानी काफी गहराई में आता है, तो उसकी ताकत ऊपर सतह तक आते-आते बिखर जाती है। 143 किलोमीटर की गहराई को ‘इंटरमीडिएट’ या गहरी कैटेगली का भूकंप माना जाता है। अगर 5.0 की तीव्रता वाला यही भूकंप जमीन के सिर्फ 5 या 10 किलोमीटर नीचे आया होता, तो सतह पर बनी इमारतों में भारी दरारें आ सकती थीं और बड़ा नुकसान हो सकता था। लेकिन 143 किलोमीटर नीचे केंद्र होने के कारण जमीन की सतह पर झटके बहुत ज्यादा घातक साबित नहीं हुए और एक बड़ा हादसा टल गया।