अपडेटेड 27 January 2026 at 08:09 IST
ईरान पर किसी भी वक्त हमला कर सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप! मिडिल ईस्ट पहुंचे अमेरिकी जंगी जहाज और युद्धपोत; समुद्र और असमान से मचाएंगे तबाही
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका पूरा स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के क्षेत्र में दाखिल हो गया।ंउ
- अंतरराष्ट्रीय न्यूज
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मिडिल ईस्ट क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसका पूरा स्ट्राइक ग्रुप सोमवार को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के क्षेत्र में दाखिल हो गया। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इन युद्धपोतों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से हटाकर तैनात किया गया है, जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही तेहरान पर हवाई हमले का आदेश दे सकते हैं।
ईरान में दिसंबर के अंत से जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रशासन द्वारा उन पर की गई कठोर कार्रवाई के बाद अमेरिका ने दबाव बढ़ा दिया है। ट्रंप प्रशासन ने इन प्रदर्शनों को दबाने के ईरानी तरीकों पर सख्त रुख अपनाया है। पिछले सप्ताह ट्रंप ने कहा था, "हमारा एक विशाल बेड़ा उस दिशा में जा रहा है। हो सकता है कि हमें इसका इस्तेमाल न करना पड़े, लेकिन यह एहतियात के तौर पर है।" इस बयान से शक्ति प्रदर्शन और संभावित हमलों की अनिश्चितता दोनों ही रणनीति का हिस्सा नजर आते हैं।
ट्रंप ने पहले ही दे रखी है ईरान को चेतावनी
इससे पहले ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी जारी की थी कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी या उनकी हत्याएं कीं, तो सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। बाद में उन्होंने दावा किया कि तेहरान ने 800 से अधिक कैदियों की प्रस्तावित फांसी रोक दी है, हालांकि ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती के साथ ही पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त लड़ाकू विमान, सैन्य मालवाहक उड़ानें और अन्य संसाधन भेजे हैं, जिससे अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ईरान के आसपास कई गुना बढ़ गई है।
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अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की पूरी ताकत
अमेरिकी नौसेना का यह स्ट्राइक ग्रुप कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3) का अभिन्न हिस्सा है, जिसका फ्लैगशिप यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) है। 19 जनवरी को यह ग्रुप मलक्का जलडमरूमध्य पार कर चुका था। अमेरिकी सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर कहा कि यह तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए की गई है।
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ग्रुप की संरचना इस प्रकार है
विमानवाहक पोत: 1 - यूएसएस अब्राहम लिंकन (परमाणु-संचालित, 1 लाख टन से अधिक वजन वाला दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत之一)। इसमें कैरियर एयर विंग-9 (CVW-9) के 70-90 लड़ाकू विमान तैनात हैं।
गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स: 3-4 (अर्लेघ बर्क-क्लास, जैसे यूएसएस माइकल मर्फी, यूएसएस स्प्रूअन्स, यूएसएस फ्रैंक ई. पीटर्सन जूनियर)। ये हवाई रक्षा, पनडुब्बी-रोधी युद्ध और जमीन पर हमलों के लिए सक्षम हैं।
क्रूजर: कभी-कभी 1 (टिकॉन्डरोगा-क्लास)।
पनडुब्बियां: 1-2 (वर्जीनिया या लॉस एंजिल्स-क्लास न्यूक्लियर अटैक सबमरीन)। ये दुश्मन जहाजों को ट्रैक कर टोमाहॉक क्रूज मिसाइलें दाग सकती हैं।
सपोर्ट जहाज: 1-2 (जैसे यूएनएस सीजर चावेज - ईंधन, गोला-बारूद और आपूर्ति वाले)।
डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन- 21 के जहाजों सहित यह पूरा ग्रुप ट्रंप को ईरान पर दबाव बनाने के लिए कई सैन्य विकल्प मुहैया कराता है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरान ने अमेरिकी तैनाती पर तीखा बयान दिया है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि किसी भी आक्रामक कदम का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव अब व्यापक युद्ध की ओर बढ़ सकता है, खासकर यदि ट्रंप प्रदर्शनों को समर्थन देने के नाम पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप का फैसला करते हैं। मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस सैन्य हलचल पर टिकी है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 27 January 2026 at 08:09 IST