चमत्कार नहीं विज्ञान का कमाल! शरीर के बाहर धड़क रहा इंसान का दिल, जिसने भी देखा VIDEO उसे हुआ अचंभा; आप भी देखिए
मेडिकल साइंस का चमत्कार अक्सर कल्पना से परे लगता है। अमेरिका की मिनेसोटा यूनिवर्सिटी की लैब से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें शरीर के बाहर असली इंसान का दिल धड़क रहा है। जानें दिल पर ये क्या रिसर्च हो रही है। पढ़ें पूरी खबर।
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Human Heart Beating outside Body: मेडिकल साइंस में अक्सर ऐसी खोजें होती हैं जो कल्पना से परे लगती हैं। अमेरिका की जानीमानी मिनेसोटा यूनिवर्सिटी (University of Minnesota) की 'विजिबल हार्ट लेबोरेटरी' में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां वैज्ञानिकों ने एक असली मानव हृदय को शरीर के बाहर न सिर्फ जीवित रखा, बल्कि वह बिना किसी पेसमेकर के नेचुरल तरीके से धड़क भी रहा है।
बिना शरीर के कैसे धड़क रहा है दिल?
विजिबल हार्ट लेबोरेटरी (Visible Heart Laboratory) में मौजूद यह हृदय मशीनों के एक जटिल जाल से जुड़ा हुआ है। ये मशीनें अंग (Heart) को निरंतर ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति करती रहती हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हृदय का अपना आंतरिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम पूरी तरह सक्रिय है, जिसके कारण ये बिना किसी बाहरी पेसमेकर के धड़क रहा है। यह कोई कंप्यूटर सिमुलेशन नहीं, बल्कि एक वास्तविक अंग है जो वैज्ञानिकों को हृदय की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझने में मदद कर रहा है।
विजिबल हार्ट लैब में पहले भी हुए चौंकाने वाले शोध
मिनेसोटा यूनिवर्सिटी कार्डियोवैस्कुलर इतिहास में हमेशा से आगे रही है। इस लैब की शुरुआत 1997 में डॉ. पॉल इयाजो और उनकी टीम ने 'मेडट्रॉनिक इंक' के सहयोग से की थी। आज ये लैब सेलुलर और टिश्यू स्टडी से लेकर पूरे शरीर की जांच (Whole body investigation) तक के लिए दुनिया की बेहतरीन जगहों में से एक है। यहां के कार्यरत स्टाफ के पास सामूहिक रूप से 100 सालों से ज्यादा शोध अनुभव है।
हार्ट वाल्व के विकास में योगदान
यूनिवर्सिटी का इतिहास सिर्फ धड़कते दिलों तक सीमित नहीं है। 1968 और उसके बाद के सालों में, यहां के सर्जनों और इंजीनियरों ने मिलकर कई तरह के प्रोस्थेटिक हार्ट वाल्व विकसित किए। इनमें 1976 में डॉ. डेमेट्रे निकोलॉफ द्वारा इम्प्लांट किया गया 'सेंट जूड बाइलीफलेट वाल्व' (St. Jude bileaflet valve) सबसे प्रमुख है, जिसने बायोमेडिकल क्षेत्र में क्रांति ला दी थी।
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यह शोध हृदय रोगों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, साथ ही इससे भविष्य में अंग प्रत्यारोपण (Transplant) की जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।