'रिटायरमेंट तक मैं यही नहीं करना चाहता...', 2 सवालों का जवाब नहीं मिला तो युवक ने कॉरपोरेट सेक्टर की नौकरी को मार दी लात, VIDEO VIRAL
35 साल के विश्वजीत मोहंती ने कॉर्पोरेट जॉब छोड़कर 'चूहे वाली दौड़' को अलविदा कहा है। जानें क्यों उन्होंने 11 साल के करियर के बाद सुकून को चुना? पढ़ें पूरी खबर।
- वायरल न्यूज़
- 3 min read

Early Retirement Trend: एक वक्त था जब एक आदमी अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ कमाने और EMI भरने में निकाल देता था, फिर बच्चों की शादी से फ्री होने के बाद रिटायरमेंट के बारे में सोचता था, तब तक 60 साल की उम्र और चेहरा बूढ़ा होने लगता था। लेकिन अब शायद रिटायरमेंट की परिभाषा बदलने लगी है। जी हां, भारत में कॉर्पोरेट जगत को हमेशा के लिए गुडबाय कहने वाला युवक इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। समझने की कोशिश करते हैं आखिर क्यों 35 साल के इस युवक की रिटायरमेंट चर्चा का विषय बनी हुई है।
बैंक बैलेंस या सुकून की नींद?
कॉर्पोरेट लाइफ को बाय-बाय कहने वाले विश्वजीत मोहंती ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने अपने दिल की बात कही। उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों से वे नौकरी, लोन की किस्तों और करियर की पढ़ाई के कभी ना खत्म होने वाले चक्र में फंसे हुए थे। उन्होंने महसूस किया कि बैंक बैलेंस आपको भौतिक सुख-सुविधाएं तो दे सकता है, लेकिन वह 'सुकून वाली नींद' और 'मानसिक शांति' नहीं खरीद सकता।
विश्वजीत के मुताबिक, करीब 3 साल पहले उनके मन में एक बुनियादी सवाल उठा था कि, 'अगर आज मेरे पास पैसों की कमी न हो, तो क्या मैं फिर भी वही काम करना चाहूंगा जो मैं अभी कर रहा हूं?' इस सवाल के जवाब ने ही उन्हें इस बड़े बदलाव के लिए प्रेरित किया।
असली दौलत- वक्त और एनर्जी (Time is the New Currency)
विश्वजीत का मानना है कि आज के दौर में असली दौलत पैसा नहीं, बल्कि हमारा 'समय और एनर्जी' है। उन्होंने अपने विचार शेयर करते लिए बोला कि, 'हम मशीनों की तरह काम तो कर रहे हैं, लेकिन क्या समाज पर हमारे काम का कोई सार्थक प्रभाव पड़ रहा है? कॉर्पोरेट की 'चूहा दौड़' (Rat Race) से बाहर निकलना अनलर्निंग (Unlearning) की एक प्रक्रिया है। रिटायरमेंट का मतलब काम छोड़ना नहीं, बल्कि अपनी एनर्जी को वहां लगाना है जहां से खुशी मिले'।
Advertisement
सोशल मीडिया पर छिड़ी लंबी बहस
विश्वजीत का 'विदाई मेल' सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोगों ने रिएक्शन देते हुए इसे '9 से 5 के जाल' से आजादी बताया, वहीं कुछ ने इसे एक बड़े जिगर वाला फैसला करार दिया।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट का मानना है कि ये मामला 'FIRE' (Financial Independence, Retire Early) आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, जहां लोग कम उम्र में ही अपनी शर्तों पर जीने को प्राथमिकता दे रहे हैं। विश्वजीत मोहंती की यह कहानी उन लाखों प्रोफेशनल्स के लिए एक आईना है, जो हर रोज ऑफिस की थकान में अपनी मुस्कान खो बैठे हैं। विश्वजीत का ये कदम याद दिलाता है कि जिंदगी सिर्फ काम के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए है।